Thursday, August 13, 2026
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Tag: Hindi

इंजीनियरिंग ग्रेजुएट ने पर्यटन गाइड बन आदिवासी जीवन को दुनिया के समक्ष लाने का बीड़ा उठाया है

उनके पिता आधिकारिक दौरों पर बस्तर के सुदूर गांवों में जाया करते थे। पिता के जरिए ही आदिवासियों में उनकी रुचि जगी। आज वह पर्यटकों को आदिवासी संस्कृति से रूबरू करा रही हैं और पर्यटन को लेकर महिलाओं का नजरिया बदलना चाहती हैं । इस बारे में उन्होंने The [...]

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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के हस्तक्षेप पर 17 साल बाद आदिम जनजाति युवक को मिला न्याय

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद उसे अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल गई। इस संबंध में मुख्यमंत्री को सूचित करते हुए उपायुक्त लातेहार ने बताया कि युवक को शिक्षा विभाग में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के रूप में नियुक्ति की स्वीकृति दी गई। The Indian Tribal की report

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आदिवासियों के लिए कर्मा पूजा का क्या है महत्व?

क्या आप जानते हैं कि कर्मा या कर्म वृक्ष (नौक्लिया परविफोलिया) की तीन शाखाएं आंगन की मिट्टी में अथवा गाँव के अखरा और सामुदायिक केंद्र में क्यों लगाई जाती हैं? The Indian Tribal की रिपोर्ट में है इसका विस्तृत जवाब

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अहोवी : मेघालय की संस्कृति का दूत गारो बैंड

गारो लोकगीत और संस्कृति को पुनर्जीवित कर रहा है सात सदस्यों वाला फोक फ्यूजन बैंड। शुरू में प्रायोगिक तौर पर शुरू हुआ यह बैंड आज अपने अनूठे संगीत के माध्यम से नई पहचान गढ़ता जा रहा है। बैंड और इसके सदस्यों की संघर्षपूर्ण यात्रा के बारे में [...]

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मुनाफे ने बदला आदिवासी किसानों का मन, खेत-खेत नजर आ रही लेमनग्रास

कपास की खेती में लगातार हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए ओडिशा के कोरापुट में आदिवासी लोग धीरे-धीरे अब लेमनग्रास की खेती की तरफ मुड़ रहे हैं। कपास के मुकाबले यह अधिक लाभ दे रही है किसानों के बदलते मिजाज पर निरोज रंजन मिश्र की विस्तृत रिपोर्ट

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सूखे बुंदेलखंड को अपनी विरासत का मोह

मध्य प्रदेश के छतरपुर और दमोह जैसे जिलों में आदिवासी भले पानी की कमी और गरीबी से जूझ रहे हों, लेकिन वे अपने घरों की दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों के आसपास के क्षेत्र को भित्तिचित्रों के माध्यम से सुंदर रूप देना नहीं भूलते। उनकी इसी रचनात्मकता पर पेश [...]

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आदिवासी लड़कियों को रहता चांदनी रातों का इंतजार

ओडिशा में एक उत्सव ऐसा होता है, जिसे केवल लड़कियां ही मनाती हैं, लेकिन उसका आनंद सभी उठाते हैं। लोगों को फसल कटाई सीजन के खत्म होने का तो लड़कियों को चांदनी रातों का बेसब्री से रहता है इंतजार। निरोज रंजन मिश्र की खास रिपोर्ट

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यहां फसल की रखवाली करते हैं ‘बंदर’ 

बच्चों के लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है कि उन्हें फसल कटने के बाद खाली हुए खेतों में स्वतंत्र रूप से दौड़ने और खेलने के लिए छोड़ दिया जाए? ओडिशा के गांवों में ऐसे नजारे आम हैं। बच्चे फसल कटाई के बाद खेतों में करते हैं [...]

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दो संथाली निर्देशकों की बाल फिल्मों ने मचाई हलचल

बच्चों पर आधारित उनकी लघु फिल्में न केवल समीक्षकों और सिने प्रेमियों द्वारा सराही गईं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इन्होंने कई पुरस्कार बटोरे। इन सथाली फिल्मों के दोनों प्रतिभाशाली निर्देशकों से बात की निरोज रंजन मिश्र ने

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पारंपरिक पोशाक से क्यों मुंह मोड़ रहीं ये महिलाएं

महाराष्ट्र के आदिवासी समुदाय में बुजुर्ग महिलाएं तो अपनी सदियों पुरानी पोशाक आज भी पहनती हैं, लेकिन नई पीढ़ी की पसंद बदल रही है। इसी सामाजिक बदलाव पर द इंडियन ट्राइबल की रिपोर्ट

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