• About
  • Contact
  • Sitemap
  • Gallery
No Result
View All Result
Vacancies
Friday, July 10, 2026
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    उत्तर बंगाल के चाय बागानों का संकट: जलवायु परिवर्तन, पलायन और महिलाओं की असुरक्षा का बढ़ता दुष्चक्र

    The Indian Tribal

    सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किये बगैर शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

    The Indian Tribal

    किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

    The Indian Tribal

    झारखण्ड के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में बढ़ेगी पहचान

    The Indian Tribal

    युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    मध्य प्रदेश के सहरिया आदिवासियों ने भूख से लड़ने के लिए अपनाए पारंपरिक तरीके

    The Indian Tribal

    झारखण्ड में विद्यार्थियों को ई-साइकिल देने की तैयारी, कौशल विकास को भी व्यवहारिक बनाने पर मुख्यमंत्री का ज़ोर

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    उत्तर बंगाल के चाय बागानों का संकट: जलवायु परिवर्तन, पलायन और महिलाओं की असुरक्षा का बढ़ता दुष्चक्र

    The Indian Tribal

    सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किये बगैर शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

    The Indian Tribal

    किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

    The Indian Tribal

    झारखण्ड के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में बढ़ेगी पहचान

    The Indian Tribal

    युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    मध्य प्रदेश के सहरिया आदिवासियों ने भूख से लड़ने के लिए अपनाए पारंपरिक तरीके

    The Indian Tribal

    झारखण्ड में विद्यार्थियों को ई-साइकिल देने की तैयारी, कौशल विकास को भी व्यवहारिक बनाने पर मुख्यमंत्री का ज़ोर

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
No Result
View All Result
The Indian Tribal
No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
  • Gallery
  • Latest News
Vacancies
Home » द इंडियन ट्राइबल / हिंदी » विविध » सूखे बुंदेलखंड को अपनी विरासत का मोह

सूखे बुंदेलखंड को अपनी विरासत का मोह

मध्य प्रदेश के छतरपुर और दमोह जैसे जिलों में आदिवासी भले पानी की कमी और गरीबी से जूझ रहे हों, लेकिन वे अपने घरों की दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों के आसपास के क्षेत्र को भित्तिचित्रों के माध्यम से सुंदर रूप देना नहीं भूलते। उनकी इसी रचनात्मकता पर पेश है The Indian Tribal की यह रिपोर्ट

July 11, 2024
बुंदेलखंड कलाकृति | द इंडियन ट्राइबल

आदिवर्त संग्रहालय

छतरपुर/दमोह (मध्य प्रदेश)

अपनी शानदार कला और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध बुंदेलखंड क्षेत्र में घूमते समय दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों के आसपास बने आकर्षक भित्तिचित्रों से सजे घर खूब दिखाई दे जाएंगे। खासकर आदिवासी क्षेत्रों में ऐसे घर यहां रहने वालों की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक समृद्धि की गवाही देते हैं।

आदिवासी समुदाय भील बहुल दमोह में ऐसे ही भित्तिचित्रों से सजा दिखता है सूरज का घर। बहुत ही आकर्षक। ये खूबसूरत चित्र सूरज की पत्नी उमा ने दिवाली के मौके पर बनाए हैं। सूरज के ही गांव की रहने वाली सुक्का नाम की महिला बताती है कि मिट्टी की दीवारों को साफ करने और प्लास्टर करने के बाद उन पर पेंटिंग बनाई जाती है। इसके लिए बाजार से रंग खरीदे जाते हैं। लकड़ी के काले दरवाजे के सामने चारपाई पर आराम फरमाते मुर्गे और मुर्गी की तस्वीर, जिसके चारों तरफ गुलाबी रंग के भित्तिचित्रों से सजावट की गई है, बहुत ही खूबसूरत और जीवंत लगती है। 

Adivasi Mural Art | The Indian Tribal
आदिवासी उमा द्वारा दमोह में अपने घर पर बनाया गया एक भित्तिचित्र
Murals around a door in Damoh | the Indian Tribal
दमोह में एक दरवाजे के चारों ओर बनाया गया भित्तिचित्र

छतरपुर जिले की एक तहसील बिजावर में भी इसी तरह के भित्तिचित्र जगह-जगह दीवारों पर दिखाई देते हैं। इस जिले में मध्य भारत की खानाबदोश जनजाति राजगोंड की काफी आबादी है।

भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में काम करने वाले सूर्या पांडे ने The Indian Tribal को बताया कि इस तरह के भित्तिचित्र क्षेत्र के आदिवासी त्योहारों के मौकों पर खूब बनाते हैं। घरों को सजाने के लिए यह उनकी बहुत ही सामान्य परंपरा है। यह इस बात को भी साबित करता है कि गरीबी और जल संकट जैसे मुद्दों से दो-चार होने के बावजूद आदिवासी लोग अपनी कलात्मक प्रतिभा को बाहर निकालने के लिए समय निकाल ही लेते हैं। 

छतरपुर और दमोह के गांवों के अलावा खजुराहो और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी सफेद दीवारों पर उभरे भित्तिचित्र या मिट्टी से की गई चित्रकारी खूब देखने को मिलती है। खजुराहो से करीब 25 किलोमीटर दूर माडला के पास टोरिया गांव में दीवारों पर मिट्टी से बनी ऐसी कलाकृतियां किसी का भी मन मोह लेती हैं। ये ऐसी बनी होती हैं कि उंगलियों से आसानी से महसूस किया जा सकता है। ये आकृतियां मुख्य रूप से मोर और सूअर जैसे जानवरों और पक्षियों के साथ-साथ कुछ अलग तरह के डिजाइनों में होती हैं।

Adivasi Mural Art | The Indian Tribal
एक रचनात्मक कार्य
coloured mural at an Adivasi house | The Indian Tribal
मध्य प्रदेश में एक आदिवासी घर में नीले रंग का भित्तिचित्र

स्थानीय निवासी दीनदयाल यादव ने कहा, ‘दीवारों पर उकेरी जाने वाली इस कला का वैसे तो कोई खास नाम नहीं है, लेकिन अमूमन इसे यहां खेल-खिलौना कहा जाता है। महिलाएं इसे अपने हाथों से बनाती हैं।’ खजुराहो में लगभग एक साल पहले खोले गए आदिवर्त संग्रहालय में इस तरह की कलाकृतियां उकेरी गई हैं, जिस कारण ये अब क्षेत्र में दोबारा लोकप्रिय हो रही हैं।

भोपाल में आदिवासी संग्रहालय के क्यूरेटर अशोक मिश्रा बताते हैं कि संग्रहालय आदिवासी कला को प्रमुखता से प्रदर्शित करता है, ताकि दुनिया भर के पर्यटक यहां आएं और मध्य भारत खासकर बुंदेलखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत को देखकर आनंद की अनुभूति कर सकें। 

Tribal Embossed relief art at Toriya village, Madla
आदिवर्त संग्रहालय

अशोक मिश्रा ने The Indian Tribal के साथ बातचीत में बताया, ‘इस क्षेत्र में दीवारों पर मिट्टी की नक्काशी आदिवासी और गैर-आदिवासी दोनों ही वर्गों के लोग करते हैं। ये भित्तिचित्र दीवारों पर बनाई गई पहली मानवीय अभिव्यक्तियों में से एक हैं। पूर्व के जमाने में लोग इन्हें फर्श पर बनाते थे, लेकिन वहां से बहुत जल्द मिट जाया करते थे। इसलिए लोगों ने दीवारों को कैनवास की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इससे भित्तिचित्र बनाने की कला लंबे समय तक टिकी रहने लगी और दीवारें भी सुंदर लगने लगीं।

अगर लोग सरकारी योजनाओं की मदद से पक्के मकान बनवाते हैं, तो फर्श और दीवारों पर कई कलाएं और भित्तिचित्र नहीं बनाते। इससे पारंपरिक रूप से दिखाई देने वाली इस कला के लुप्त होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। मिश्रा का मानना है कि भले ही विकास जरूरी प्रक्रिया है, लेकिन ऐसी कला को हर कीमत पर संरक्षित किया जाना चाहिए। आदिवर्त संग्रहालय का उद्देश्य यही है। 

पानी की कमी और उच्च पलायन दर के लिए कुख्यात इस सूखे क्षेत्र में कई आदिवासी परिवारों को रबी सीजन में दूसरी फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें सिंचाई सुविधाओं के लिए मदद दी जाती है ताकि वे अपना घर-बार छोड़ कर न जाएं। कुछ लोग फल उगाकर भी अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। गैर-लाभकारी संस्था हरितिका छतरपुर और दमोह जैसे जिलों में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शिद्दत से काम कर रही है।

दमोह के सूरजपुरा गांव के रहने वाले दिनेश आदिवासी कहते हैं कि पहले वे पानी की कमी के कारण रबी में गेहूं नहीं बो पाते थे। केवल खरीफ में बारिश का सहारा मिलता था तो वह मक्का की फसल उगाते थे। हालांकि, वह कहते हैं कि अब धीरे-धीरे चीजें बदल रही हैं।

Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri

In Numbers

49.4 %
Female Literacy rate of Scheduled Tribes

Update

झारखंड में PVTG परिवारों को अब मनरेगा में मिलेंगे 150 दिन का रोजगार

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक में विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTG) के लिए बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट ने राज्य में मनरेगा के तहत इन्हें वित्तीय वर्ष में निर्धारित 100 दिनों के रोजगार के अतिरिक्त 50 दिनों का और रोजगार उपलब्ध कराने को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही PVTG परिवारों को अब वर्ष में कुल 150 दिनों का रोजगार मिल सकेगा। बैठक में वीबी-जी रामजी (VB-G RAM G) पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सम्यक विचार-विमर्श के बाद मंत्रिपरिषद ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी। मनरेगा के तहत अतिरिक्त 50 दिनों के रोजगार का यह निर्णय इन अत्यंत कमजोर जनजातीय समुदायों की आजीविका सुरक्षा, आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों से मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। झारखंड देश के उन राज्यों में शामिल है जहां PVTG की सबसे अधिक आबादी निवास करती है। राज्य में नौ PVTG समुदाय—असुर, बिरहोर, बिरजिया, कोरवा, माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, परहैया, पहाड़िया (कुमारभाग) और सावर—अधिसूचित हैं।
The Indian Tribal
आदिवासी

सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किये बगैर शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

by The Indian Tribal
June 30, 2026

हूल दिवस पर मुख्यमंत्री सोरेन ने झारखण्ड की राजधानी रांची में सिदो-कान्हू उद्यान परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर में शामिल होकर रक्तदाताओं के बीच प्रशस्ति-पत्र भी वितरित किया। The Indian Tribal की रिपोर्ट

The Indian Tribal

In Palamau Tiger Reserve In Jharkhand, Tribal Traditions Strengthen Big Cat Conservation

June 28, 2026
The Indian Tribal

सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

June 25, 2026
The Indian Tribal

किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

June 24, 2026
The Indian Tribal

झारखण्ड के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में बढ़ेगी पहचान

June 17, 2026
The Indian tribal

As North Bengal’s Tea Gardens Shut Shop, Tribal Women Pay The Price

June 16, 2026
Tags: Art & CultureHindiMadhya PradeshThe Indian Tribal
Previous Post

जानवरों की नकल कर छिपी वस्तु खोजो तो जानें

Next Post

Teenaged Tribal Girls Are India’s New Rugby Stars

Top Stories

The Indian Tribal
Delhi

Hemant Soren Pitches ‘Minds Over Mines’ As Jharkhand Seeks Industry Inputs On Vision 2050

July 8, 2026
The Indian Tribal
Adivasi

TRIs To Drive Evidence-Based Tribal Policy As ‘Bhubaneswar Declaration’ Charts Reform Agenda

July 8, 2026
The Indian Tribal
Adivasi

Tribal Research Institutes Set For Overhaul; Centre Launches TribeX Digital Learning Platform

July 7, 2026
Load More
  • About Us
  • Editor & Writers
  • Contact
  • Redressal
  • Copyright Policy
  • Privacy Policy And Terms Of Use
  • Disclaimer
  • Sitemap

  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Hindi Featured
  • India
  • News
  • Legal
  • Music
  • Sports
  • Trending
  • Chhattisgarh
  • Delhi
  • Gujarat
  • Jammu & Kashmir
  • Jharkhand
  • Kerala
  • Madhya Pradesh
  • Maharashtra
  • North East
  • Arunachal Pradesh
  • Assam
  • Manipur
  • Meghalaya
  • Mizoram
  • Nagaland
  • Sikkim
  • Tripura
  • Odisha
  • Telangana
  • West Bengal
  • Political News
  • Variety
  • Art & Culture
  • Entertainment
  • Adivasi
  • Tribal News
  • Scheduled Tribes
  • हिंदी
  • उपलब्धिकर्ता
  • कानूनी
  • खान पान
  • खेलकूद
  • स्वास्थ्य
  • संस्कृति
  • संगीत
  • विविध
  • कला और संस्कृति
  • खबरें
  • असम की ताज़ा ख़बरें
  • अरुणाचल प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • ओडिशा की ताज़ा ख़बरें
  • केरल की ताज़ा ख़बरें
  • गुजरात की ताज़ा ख़बरें
  • छत्तीसगढ़
  • जम्मू और कश्मीर की ताज़ा ख़बरें
  • झारखंड न्यूज़
  • तेलंगाना की ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • नॉर्थईस्ट की ताज़ा ख़बरें
  • पश्चिम बंगाल की ताज़ा ख़बरें
  • मध्य प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • महाराष्ट्र की ताज़ा ख़बरें
  • त्रिपुरा की ताज़ा ख़बरें
  • नागालैंड की ताज़ा ख़बरें
  • मणिपुर की ताज़ा ख़बरें
  • मिजोरम की ताज़ा ख़बरें
  • मेघालय की ताज़ा ख़बरें
  • सिक्किम की ताज़ा ख़बरें
  • राजस्थान की ताज़ा ख़बरें

About Us

The Indian Tribal is India’s first bilingual (English & Hindi) digital journalistic venture dedicated exclusively to the Scheduled Tribes. The ambitious, game-changer initiative is brought to you by Madtri Ventures Pvt Ltd (www.madtri.com). From the North East to Gujarat, from Kerala to Jammu and Kashmir — our seasoned journalists bring to the fore life stories from the backyards of the tribal, indigenous communities comprising 10.45 crore members and constituting 8.6 percent of India’s population as per Census 2011. Unsung Adivasi achievers, their lip-smacking cuisines, ancient medicinal systems, centuries-old unique games and sports, ageless arts and crafts, timeless music and traditional musical instruments, we cover the Scheduled Tribes community like never-before, of course, without losing sight of the ailments, shortcomings and negatives like domestic abuse, alcoholism and malnourishment among others plaguing them. Know the unknown, lesser-known tribal life as we bring reader-engaging stories of Adivasis of India.

Follow Us

All Rights Reserved

© 2026 Madtri Ventures [P] Ltd.

No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
    • उपलब्धिकर्ता
    • खान पान
    • कानूनी
    • खेलकूद
    • खेलकूद
    • संगीत
    • संगीत
    • स्वास्थ्य
    • स्वास्थ्य
    • विविध
  • Gallery
  • Videos

© 2026 Madtri Ventures [P] Ltd.