सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?
आदिवासी समुदाय अपनी पारंपरिक आस्थाओं को अलग धार्मिक श्रेणी के रूप में दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अलग कोड के अभाव में उनकी विशिष्ट धार्मिक पहचान बड़े धर्मों में समाहित होकर अदृश्य हो जाती है। विशाल तिवारी की रिपोर्ट
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