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Home » द इंडियन ट्राइबल / हिंदी » विविध » सिर्फ पूजा नहीं, जीवन और प्रकृति का उत्सव है यह आदिवासी पर्व

सिर्फ पूजा नहीं, जीवन और प्रकृति का उत्सव है यह आदिवासी पर्व

भारत भर में युवाओं, प्रकृति और जंगलों के साथ मानवीय रिश्ते का अनूठा उत्सव है कर्मा पूजा, जिसमें शामिल हैं गीत, नृत्य और अनगिनत लोककथाएँ। The Indian Tribal की रिपोर्ट

September 28, 2025
The Indian Tribal

कर्मा पर्व पर थिरकते युवक युवतियां

नई दिल्ली/रांची

कर्मा पूजा — जिसे करम और करम परब भी कहा जाता है — भारत के सबसे महत्वपूर्ण आदिवासी त्योहारों में से एक है। यह मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम में मनाया जाता है और इसका संबंध है कर्मा देवता से, जिन्हें युवा, शक्ति और उर्वरता का देवता माना जाता है।
इस वर्ष कर्मा पूजा 3 सितंबर को मनाई जाएगी।

आदिवासी समाज के लिए कर्मा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवंत परंपरा है, जो उन्हें प्रकृति, मिथकों, संगीत और उल्लास से जोड़ती है। आज भी यह पर्व आदिवासी अंचलों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। रांची, जमशेदपुर, रायपुर और राउरकेला जैसे शहरों में आदिवासी संगठन सार्वजनिक समारोह आयोजित करते हैं, जिनमें हजारों लोग शामिल होते हैं। प्रवासी आदिवासियों के लिए यह त्योहार पहचान और गौरव का प्रतीक बन चुका है।

कर्मा पूजा का मूल

कर्मा पूजा का केंद्र है कर्मा वृक्ष, जिसे जीवन, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। युवा पुरुष और महिलाएँ जंगल से इसकी शाखाएँ लाते हैं और इन्हें गाँव के अखाड़ा (नृत्य स्थल) या आँगन में गाड़कर पूजा करते हैं।

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सुसज्जित करम वृक्ष

प्रमुख अनुष्ठान

  • अविवाहित लड़कियाँ अपने भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत और शुद्धिकरण करती हैं।
  • कर्मा शाखा की पूजा दूध, चावल, फूल और देशी शराब से होती है।
  • पूरी रात मदल, मंदर, नगाड़ा और पारंपरिक गीतों के साथ कर्मा शाखा के चारों ओर नृत्य होता है।
  • सामूहिक भोज का आयोजन किया जाता है, जिसमें कोदो-ज्वार जैसे मिलेट्स, हांड़िया (चावल की बियर) और मांसाहारी व्यंजन प्रमुख रहते हैं।

कौन-कौन सी जनजातियाँ मनाती हैं कर्मा?

इस पर्व को अनेक आदिवासी समुदाय मनाते हैं, जिनमें उरांव, मुंडा, हो, संथाल, खड़िया, खरवार, बैगा, गोंड, कोल, महली, बिरहोर, असुर, भूमिज और कुरुख शामिल हैं। हर जनजाति अपने विशेष गीत, कथाएँ और परंपराएँ जोड़ती है, जिससे यह त्योहार विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण बनता है।

अलग-अलग राज्यों में कर्मा का रंग

  • झारखंड: कर्मा का सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है। यहाँ लड़कियों का व्रत, कर्मा शाखा की स्थापना और अखाड़े में जबरदस्त नृत्य इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं। गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा और खूंटी जैसे इलाकों में पूरा गाँव पूरी रात जागकर पर्व मनाता है।
  • छत्तीसगढ़: यहाँ इसे कर्मा जात्रा कहते हैं। गोंड और बैगा जनजातियाँ भव्य शोभायात्राएँ निकालती हैं और लोकनाट्यों के जरिए कर्मा देवता की कथाएँ प्रस्तुत करती हैं।
  • ओडिशा: यहाँ भुईयाँ और बथुड़ी जनजातियों में यह पर्व फसल उत्सव से जुड़ जाता है। महिलाएँ उर्वरता की देवी की पूजा में अग्रणी भूमिका निभाती हैं।
  • मध्य प्रदेश: गोंड और बैगा यहाँ कर्मा मनाते हैं, जहाँ पारंपरिक शराब और मिलेट से बने पकवान अर्पण में शामिल होते हैं। कई जगह उत्सव कई दिनों तक चलता है।
  • बिहार: दक्षिणी आदिवासी इलाकों में लड़कियाँ कड़े व्रत रखकर परिवार की समृद्धि के लिए कर्मा वृक्ष की पूजा करती हैं।
  • पश्चिम बंगाल और असम: यहाँ संथाल, मुंडा और उरांव समुदाय इसे सामुदायिक नृत्य और लोकनाट्य के साथ खुले मैदानों में मनाते हैं।
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कर्मा पर्व पूरे पारम्परिक रीति रिवाज़ों से मनाया जाता है

परंपराओं में अंतर

  • उपवास: झारखंड और बिहार में उपवास प्रमुख है, जबकि छत्तीसगढ़ और ओडिशा में शोभायात्रा और नृत्य प्रमुख हैं।
  • महिलाओं की भूमिका: बिहार और ओडिशा में बहनों का व्रत मुख्य है, जबकि झारखंड और छत्तीसगढ़ में युवतियाँ और युवक दोनों समान रूप से नृत्य और उत्सव में भाग लेते हैं।
  • भोजन और पेय: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में स्थानीय शराब और मिलेट व्यंजन प्रधान हैं, जबकि झारखंड में हड़िया (चावल की बियर) का महत्व है।
  • कथाएँ और लोकनाट्य: छत्तीसगढ़ में कर्मा देवता की कथाओं पर आधारित लोकनाट्य आम है।

कर्मा से जुड़ी लोककथाएँ और मिथक

  1. सात भाइयों की कथा: सात भाइयों ने अपनी पत्नियों और खेतों की उपेक्षा की। सबसे छोटे भाई ने कर्मा वृक्ष की पूजा की और उसे समृद्धि मिली। बड़े भाइयों ने ईर्ष्या में पेड़ काट डाला और दुर्भाग्य का शिकार हो गए। फिर दोबारा पूजा करने पर सुख-समृद्धि लौटी। यह कथा प्रकृति और सामुदायिक एकता के महत्व को दर्शाती है।
  2. युवाओं के संरक्षक कर्मा देवता: विश्वास है कि कर्मा देवता युवाओं को शक्ति, उर्वरता और सामाजिक सौहार्द का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक होती है।
  3. उर्वरता और फसल: यह पर्व कृषि चक्र से जुड़ा है। कर्मा वृक्ष की पूजा अच्छी फसल और आपदाओं से रक्षा सुनिश्चित करती है।
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करम वृक्ष की पूजा करती आदिवासी महिलाएं

धर्म से परे: सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिस्थितिक महत्व

  • सामाजिक जुड़ाव: कर्मा युवाओं, मित्रता और सामुदायिक भावना का पर्व है, जो गाँवों में एकजुटता को मजबूत करता है।
  • सांस्कृतिक अभिव्यक्ति: आदिवासी कला, वेशभूषा, आभूषण और संगीत इस अवसर पर सबसे सुंदर रूप में सामने आते हैं।
  • पर्यावरणीय संदेश: कर्मा वृक्ष की पूजा के जरिए आदिवासी समाज जंगलों और प्रकृति से अपने गहरे रिश्ते को फिर से पुष्ट करता है। यह स्थायी जीवन और पर्यावरण संरक्षण की याद भी दिलाता है।
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आईएचएम रांची की ‘मडुआ लड्डू’ कृति को मिला कॉपीराइट पंजीकरण

इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड अप्लाइड न्यूट्रिशन, रांची (आईएचएम रांची) ने शोध, नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय ने संस्थान द्वारा विकसित “मडुआ लड्डू” शीर्षक कृति को कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अंतर्गत औपचारिक रूप से पंजीकृत किया है। इसके लिए आवेदन 16 मई 2026 को दाखिल किया गया था तथा पंजीकरण प्रमाणपत्र 22 जुलाई 2026 को जारी किया गया। यह कृति आईएचएम रांची के प्राचार्य डॉ. भूपेश कुमार, वरिष्ठ व्याख्याता रवि कुमार तथा व्याख्याता रजनीश कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। झारखंड के घर-घर में लोकप्रिय मडुआ आधारित पारंपरिक व्यंजन को सुव्यवस्थित, मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से दस्तावेजीकृत विधि में प्रस्तुत करना इस कार्य की प्रमुख विशेषता है। मडुआ, जिसे रागी या फिंगर मिलेट के नाम से भी जाना जाता है, झारखंड की खाद्य संस्कृति का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। पोषण की दृष्टि से उपयोगी होने के साथ-साथ यह कम पानी में उगने वाली जलवायु-अनुकूल फसल भी है। ऐसे में मडुआ आधारित उत्पादों के वैज्ञानिक विकास और दस्तावेजीकरण से स्थानीय खाद्य परंपराओं के संरक्षण, पोषण संवर्धन, उद्यमिता और रोजगार सृजन की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। आईएचएम रांची लंबे समय से झारखंड के स्थानीय अनाजों, जनजातीय खाद्य परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक आतिथ्य शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।
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