• About
  • Editor & Writers
  • Contact
  • Sitemap
No Result
View All Result
Support Our Mission
Sunday, August 2, 2026
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में आदिवासी परंपराएं बनीं बाघ संरक्षण की नई ताकत

    The Indian Tribal

    झारखंड को मिलेगा अपना फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, SRFTI के साथ हुआ समझौता

    The Indian Tribal

    ओडिशा के आदिवासी किसान की देशी धान की विलुप्त होती किस्मों को बचाने का मिशन

    The Indian Tribal

    उत्तर बंगाल के चाय बागानों का संकट: जलवायु परिवर्तन, पलायन और महिलाओं की असुरक्षा का बढ़ता दुष्चक्र

    The Indian Tribal

    सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किये बगैर शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

    The Indian Tribal

    किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

    The Indian Tribal

    झारखण्ड के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में बढ़ेगी पहचान

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में आदिवासी परंपराएं बनीं बाघ संरक्षण की नई ताकत

    The Indian Tribal

    झारखंड को मिलेगा अपना फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, SRFTI के साथ हुआ समझौता

    The Indian Tribal

    ओडिशा के आदिवासी किसान की देशी धान की विलुप्त होती किस्मों को बचाने का मिशन

    The Indian Tribal

    उत्तर बंगाल के चाय बागानों का संकट: जलवायु परिवर्तन, पलायन और महिलाओं की असुरक्षा का बढ़ता दुष्चक्र

    The Indian Tribal

    सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किये बगैर शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

    The Indian Tribal

    किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

    The Indian Tribal

    झारखण्ड के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में बढ़ेगी पहचान

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
No Result
View All Result
The Indian Tribal
No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
  • Gallery
  • Latest News
Support Our Mission
Home » द इंडियन ट्राइबल / हिंदी » यहाँ आदिवासी समुदाय के खूबसूरत चांदी के आभूषण लुप्त हो रहे हैं

यहाँ आदिवासी समुदाय के खूबसूरत चांदी के आभूषण लुप्त हो रहे हैं

पुराने जमाने से जम्मू-कश्मीर की घुमंतू आदिवासी महिलाओं की शान रहे चांदी के आभूषण और उनके डिजाइन के महत्व, मान्यता और धीरे-धीरे विलुप्त होने के कारणों की पड़ताल करती THE INDIAN TRIBAL की विशेष रिपोर्ट

March 31, 2023
जम्मू-कश्मीर के आदिवासी समुदाय के आभूषण। The Indian Tribal

गुज्जर-बकरवाल जनजाति की लड़कियां चांदी के खूबसूरत आभूषणों में

जम्मू/श्रीनगर

पुराने जमाने से ही चांदी जम्मू-कश्मीर में विशेषकर गुज्जर-बकरवाल जनजातियों का पसंदीदा पारंपरिक गहना रहा है। आज भी ज्यादातर खानाबदोश परिवारों की महिलाएं सोने के बजाय चांदी के बने आभूषण ही अधिक पसंद करती हैं। माता-पिता तो शादी में बेटी को चांदी के गहने भेंट करते ही हैं, ससुराल में भी दुल्हन का स्वागत इन्हीं गहनों से किया जाता है।

The Indian Tribal से बात करते हुए शोधकर्ता एवं लेखक डॉ. जावेद राही कहते हैं कि गुज्जर और बकरवाल आदिवासी महिलाएं बेहतरीन कसीदाकारी वाले भारी-भरकम चांदी के आभूषण पहनती हैं। वे विशेष रूप से गनी और हसीरी जैसे गर्दन में पहने जाने वाले गहनों को पसंद करती हैं।

इसमें चांदी के छोटे-छोटे टुकड़ों से बनी चकदीदार डोडमाला भी खूब पहनी जाती है। इसी प्रकार हामेल होता है जो एक साथ जुड़े चांदी के सिक्कों और एक भारी लटकन के साथ बड़ा खूबसूरत लगता है। इसके अलावा मनके वाली जोमाला और भारी बैंड जैसी हंसली भी लोकप्रिय है।

खुद गुज्जर-बकरवाल जनजाति से ताल्लुक रखने वाले डॉ. राही लोकप्रिय त्रिकोणीय लटकन के महत्व को विस्तार से समझाते हैं। डॉ. राही ने  बताया  कि इस लटकन या पेंडेंट के बीच में एक कीमती पत्थर जड़ा हुआ होता है। यह बुरी नजर से बचने का प्रतीक होता है और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए भी इसे पहना जाता है।

The Indian Tribal News | Ornaments of Gujjar and Bakerwal tribe in Jammu and Kashmir

युवा लड़कियां छोटी से छोटी नोज पिन या नाली खूब शौक से पहनती हैं। बड़ी उम्र की लड़कियां तीरा और विवाहित महिलाएं नाक में बड़े और जटिल कसीदाकारी वाले आभूषण पहनती हैं, जिन्हें अमूमन लौंग कहा जाता है। ज्यादातर आदिवासी लड़कियों और महिलाओं की नाक छिदवाई जाती है। युवा लड़कियां छोटी से छोटी नोज पिन या नाली खूब शौक से पहनती हैं।

डॉ. राही के अनुसार, कुछ लड़कियां मुर्की भी पसंद करती हैं। यह नाक पट में एक गोल बारीक गढ़े हुए तार की बनी रिंग होती है। बड़ी उम्र की लड़कियों को तीरा पहने देखा जा सकता है। यह थोड़ी बड़ी नोज पिन होती है, जबकि विवाहित महिलाएं नाक में बड़े और जटिल कसीदाकारी वाले आभूषण पहनती हैं, जिन्हें अमूमन लौंग कहा जाता है।

आदिवासी महिलाएं कानों में इतने भारी छल्ले व घंटियों वाली दर्जन-दर्जन बाली पहनती हैं कि उनके कानों की लौ की त्वचा वजन के कारण नीचे लटक जाती है, या कभी-कभी कट जाती है। बहुत सी जनजातीय महिलाओं को मोटे चांदी के कड़े वाले झुमके पहने भी देखा जा सकता है।

गुज्जर दुल्हनें अपनी शादी में चेन, दोलारा, सरगस्त, महाल, गनी, झुमके, चूडिय़ां और अंगूठी जैसे एक से बढक़र एक गहने पहनकर सजती-संवरती हैं।

यही नहीं, आदिवासी पुरुष भी चांदी के आभूषण खूब पहनते हैं। आम तौर पर वे कुर्ते के बटन या मोगला नामक स्टड जो कफलिंक के रूप में उपयोग किए जाते हैं, पहनते हैं। कोई-कोई पुरुष अंगुथरा के साथ झंझरा नामक चांदी की पायल भी पहनते हैं। अंगुथरा पैर के अंगूठे में पहनी जाने वाली चांदी की अंगूठी को कहा जाता है।

क्यों सदियों पुरानी प्रथा अब हो रही समाप्त?

The Indian Tribal News | Ornaments of Gujjar and Bakerwal tribe in Jammu and Kashmir
जम्मू-कश्मीर के आदिवासी समुदाय के खूबसूरत चांदी के आभूषण

आदिवासी लोग चांदी के आभूषण सदियों से ही पहनते आ रहे हैं, लेकिन नई पीढिय़ों में यह प्रथा या शौक खत्म हो रहे हैं। सोने से बने आभूषणों की तुलना में चांदी के गहने भारी होते हैं। इनके जटिल डिजाइन और उनके बीच में जड़े रंगीन मोती आकर्षक भी लगते हैं।

डॉ. राही के अनुसार खानाबदोश लोगों के दिमाग में आज भी वे ही पुराने डिजाइन बसे होते हैं, लेकिन मौजूदा दौर के पेशेवर आभूषण निर्माता उनकी पसंद के या पुराने गहनों की डिजाइन नकल करने में खुद को असमर्थ पाते हैं।

पुराने जमाने जैसे गहने गढऩे-जडऩे वाले शिल्पकार अब गिने-चुने ही रह गए हैं। पुरानी, जटिल कसीदाकारी छोडक़र सुनारों की नई पीढ़ी ने या तो कारोबार बदल लिए हैं अथवा आभूषण बनाने के लिए मशीनों का उपयोग करने लगे हैं जिनमें कम मेहनत और कम लागत आती है। इसलिए उनमें वह पुराना आकर्षण भी नहीं होता।

शहरों में रहने वाले आदिवासी परिवारों ने तो अब सोने के आभूषण पहनना शुरू कर दिए हैं। हालांकि, खानाबदोश आज भी चांदी के आभूषण ही पसंद करते हैं।

Support Our Mission

The Indian Tribal

For the past four-and-a-half years, we have travelled across India to bring to our readers the ‘Unknown, Lesser-Known Tribal Life’, which rarely finds space in the mainstream media.

We have done this without external funding, driven only by our conviction that India’s tribal heritage deserves to be documented with dignity, depth and authenticity.

If you like our work, and if it has informed, inspired or helped you understand India’s tribal/indigenous communities better, we invite you to become a part of this mission.

Your contribution will not merely fund a news platform. It will help preserve voices, traditions, histories and aspirations that form an invaluable part of India’s identity.

Because when an untold story is documented, a piece of India’s heritage is preserved forever.

Thanks
Editor

Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri

In Numbers

49.4 %
Female Literacy rate of Scheduled Tribes

Update

आईएचएम रांची की ‘मडुआ लड्डू’ कृति को मिला कॉपीराइट पंजीकरण

इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड अप्लाइड न्यूट्रिशन, रांची (आईएचएम रांची) ने शोध, नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय ने संस्थान द्वारा विकसित “मडुआ लड्डू” शीर्षक कृति को कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अंतर्गत औपचारिक रूप से पंजीकृत किया है। इसके लिए आवेदन 16 मई 2026 को दाखिल किया गया था तथा पंजीकरण प्रमाणपत्र 22 जुलाई 2026 को जारी किया गया। यह कृति आईएचएम रांची के प्राचार्य डॉ. भूपेश कुमार, वरिष्ठ व्याख्याता रवि कुमार तथा व्याख्याता रजनीश कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। झारखंड के घर-घर में लोकप्रिय मडुआ आधारित पारंपरिक व्यंजन को सुव्यवस्थित, मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से दस्तावेजीकृत विधि में प्रस्तुत करना इस कार्य की प्रमुख विशेषता है। मडुआ, जिसे रागी या फिंगर मिलेट के नाम से भी जाना जाता है, झारखंड की खाद्य संस्कृति का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। पोषण की दृष्टि से उपयोगी होने के साथ-साथ यह कम पानी में उगने वाली जलवायु-अनुकूल फसल भी है। ऐसे में मडुआ आधारित उत्पादों के वैज्ञानिक विकास और दस्तावेजीकरण से स्थानीय खाद्य परंपराओं के संरक्षण, पोषण संवर्धन, उद्यमिता और रोजगार सृजन की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। आईएचएम रांची लंबे समय से झारखंड के स्थानीय अनाजों, जनजातीय खाद्य परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक आतिथ्य शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।
The Indian Tribal
Adivasi

Inside The Marriage Traditions Of Odisha’s PVTGs

by The Indian Tribal
July 24, 2026

The report by Utkal University’s Centre of Excellence in Studies on Tribal and Marginalized Communities urges systematic documentation of indigenous marriage customs before rapid socio-economic change erodes their centuries-old traditions. The Indian Tribal reports. Part-2

The Indian Tribal

How Odisha’s PVTGs Preserve Their Marriages

July 23, 2026
The Indian Tribal

झारखंड को मिलेगा अपना फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, SRFTI के साथ हुआ समझौता

July 22, 2026
The Indian Tribal

ओडिशा के आदिवासी किसान की देशी धान की विलुप्त होती किस्मों को बचाने का मिशन

July 17, 2026
The Indian Tribal

Conflict-Hit Manipur Keeps Football Alive As Indigenous Coaches Continue To Build Future Stars

July 15, 2026
The Indian Tribal

Teejan Bai Changed More Than Pandavani, She Redefined India’s Folk Imagination

July 11, 2026
Previous Post

Lord Hanuman And The Tribal Lore In Jharkhand

Next Post

क्या वाकई इस पहाड़ पर चढऩे से 10 साल बढ़ जाती है जवानी और उम्र?

Top Stories

The Indian Tribal
Adivasi

How Dhimsa Danced Its Way Into Guinness World Records In Bhogapuram

August 1, 2026
The Indian Tribal
Adivasi

President Murmu Hails Bastar’s Cultural Revival, Says Tribal Heritage And Development Must Go Together

July 30, 2026
The indian Tribal
Adivasi

MoTA, CSIR-NBRI Sign 3-Year Pact To Conserve Tribal Bioresources, Protect Traditional Knowledge

July 29, 2026
Load More
  • About Us
  • Editor & Writers
  • Contact
  • Redressal
  • Copyright Policy
  • Privacy Policy And Terms Of Use
  • Disclaimer
  • Sitemap

  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Hindi Featured
  • India
  • News
  • Legal
  • Music
  • Sports
  • Trending
  • Chhattisgarh
  • Delhi
  • Gujarat
  • Jammu & Kashmir
  • Jharkhand
  • Kerala
  • Madhya Pradesh
  • Maharashtra
  • North East
  • Arunachal Pradesh
  • Assam
  • Manipur
  • Meghalaya
  • Mizoram
  • Nagaland
  • Sikkim
  • Tripura
  • Odisha
  • Telangana
  • West Bengal
  • Political News
  • Variety
  • Art & Culture
  • Entertainment
  • Adivasi
  • Tribal News
  • Scheduled Tribes
  • हिंदी
  • उपलब्धिकर्ता
  • कानूनी
  • खान पान
  • खेलकूद
  • स्वास्थ्य
  • संस्कृति
  • संगीत
  • विविध
  • कला और संस्कृति
  • खबरें
  • असम की ताज़ा ख़बरें
  • अरुणाचल प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • ओडिशा की ताज़ा ख़बरें
  • केरल की ताज़ा ख़बरें
  • गुजरात की ताज़ा ख़बरें
  • छत्तीसगढ़
  • जम्मू और कश्मीर की ताज़ा ख़बरें
  • झारखंड न्यूज़
  • तेलंगाना की ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • नॉर्थईस्ट की ताज़ा ख़बरें
  • पश्चिम बंगाल की ताज़ा ख़बरें
  • मध्य प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • महाराष्ट्र की ताज़ा ख़बरें
  • त्रिपुरा की ताज़ा ख़बरें
  • नागालैंड की ताज़ा ख़बरें
  • मणिपुर की ताज़ा ख़बरें
  • मिजोरम की ताज़ा ख़बरें
  • मेघालय की ताज़ा ख़बरें
  • सिक्किम की ताज़ा ख़बरें
  • राजस्थान की ताज़ा ख़बरें

About Us

The Indian Tribal is India’s first bilingual (English & Hindi) digital journalistic venture dedicated exclusively to the Scheduled Tribes. The ambitious, game-changer initiative is brought to you by Madtri Ventures Pvt Ltd (www.madtri.com). From the North East to Gujarat, from Kerala to Jammu and Kashmir — our seasoned journalists bring to the fore life stories from the backyards of the tribal, indigenous communities comprising 10.45 crore members and constituting 8.6 percent of India’s population as per Census 2011. Unsung Adivasi achievers, their lip-smacking cuisines, ancient medicinal systems, centuries-old unique games and sports, ageless arts and crafts, timeless music and traditional musical instruments, we cover the Scheduled Tribes community like never-before, of course, without losing sight of the ailments, shortcomings and negatives like domestic abuse, alcoholism and malnourishment among others plaguing them. Know the unknown, lesser-known tribal life as we bring reader-engaging stories of Adivasis of India.

Follow Us

All Rights Reserved

© 2026 Madtri Ventures [P] Ltd.

No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
    • उपलब्धिकर्ता
    • खान पान
    • कानूनी
    • खेलकूद
    • खेलकूद
    • संगीत
    • संगीत
    • स्वास्थ्य
    • स्वास्थ्य
    • विविध
  • Gallery
  • Videos

© 2026 Madtri Ventures [P] Ltd.