• About
  • Contact
  • Sitemap
  • Gallery
No Result
View All Result
Vacancies
Wednesday, July 15, 2026
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    उत्तर बंगाल के चाय बागानों का संकट: जलवायु परिवर्तन, पलायन और महिलाओं की असुरक्षा का बढ़ता दुष्चक्र

    The Indian Tribal

    सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किये बगैर शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

    The Indian Tribal

    किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

    The Indian Tribal

    झारखण्ड के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में बढ़ेगी पहचान

    The Indian Tribal

    युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    मध्य प्रदेश के सहरिया आदिवासियों ने भूख से लड़ने के लिए अपनाए पारंपरिक तरीके

    The Indian Tribal

    झारखण्ड में विद्यार्थियों को ई-साइकिल देने की तैयारी, कौशल विकास को भी व्यवहारिक बनाने पर मुख्यमंत्री का ज़ोर

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    उत्तर बंगाल के चाय बागानों का संकट: जलवायु परिवर्तन, पलायन और महिलाओं की असुरक्षा का बढ़ता दुष्चक्र

    The Indian Tribal

    सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किये बगैर शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

    The Indian Tribal

    किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

    The Indian Tribal

    झारखण्ड के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग, राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में बढ़ेगी पहचान

    The Indian Tribal

    युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    मध्य प्रदेश के सहरिया आदिवासियों ने भूख से लड़ने के लिए अपनाए पारंपरिक तरीके

    The Indian Tribal

    झारखण्ड में विद्यार्थियों को ई-साइकिल देने की तैयारी, कौशल विकास को भी व्यवहारिक बनाने पर मुख्यमंत्री का ज़ोर

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
No Result
View All Result
The Indian Tribal
No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
  • Gallery
  • Latest News
Vacancies
Home » द इंडियन ट्राइबल / हिंदी » विविध » किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर में एक 31 वर्षीय युवा की पंचायत चुनाव में जीत को राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लिखती हैं आँचल सेठ

June 24, 2026
The Indian Tribal

मनमोहक नाको लेक के किनारे बसे किन्नौरवासी

किन्नौर

एक ऐसे स्थान पर जहां पहाड़ अस्थिर हैं, सड़कें अक्सर टूट जाती हैं और विकास के प्रभाव सीधे जमीन पर महसूस किए जाते हैं, वहां 31 वर्षीय एक युवा की जीत ने चर्चा पैदा कर दी है। इसे जिले में हो रहे एक व्यापक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है, जहां युवा पर्यावरणीय चिंताओं, भूमि की राजनीति और संवैधानिक अधिकारों को सार्वजनिक जीवन के केंद्र में ला रहे हैं। और इस जनजातीय जिले में इसका विशेष महत्व है।

रारंग ग्राम पंचायत के नवनिर्वाचित उप प्रधान योवन नेगी ने कहा कि वह अपने घोषणा-पत्र में किए गए वादों के अनुरूप कार्य जारी रखेंगे, विशेष रूप से जनभागीदारी को मजबूत करने, स्थानीय शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने और स्थानीय सहमति पर आधारित निर्णय लेने के लिए।

उन्होंने दोहराया, “विकास लोगों की भागीदारी से होना चाहिए, उनकी आवाज को नजरअंदाज करके नहीं।”

उनकी टिप्पणियां जमीनी लोकतंत्र में पर्यावरणीय चिंताओं, संवैधानिक अधिकारों और सामुदायिक भागीदारी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती हैं।

राज्यभर में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 26 मई, 28 मई और 30 मई को तीन चरणों में आयोजित किए गए थे, जबकि मतगणना 31 मई को हुई थी।

पर्यावरणीय चिंता ने किन्नौर की राजनीति को कैसे बदला

किन्नौर वर्षों से भूस्खलन, ढलानों के धंसने और सड़कों तथा बागानों को बार-बार होने वाले नुकसान का सामना कर रहा है। बटसेरी और निगुलसरी भूस्खलनों ने जिले पर गहरा प्रभाव छोड़ा और इस आशंका को और मजबूत किया कि जब हिमालयी क्षेत्र की नाजुक भू-आकृति पर अत्यधिक दबाव डाला जाता है तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं।

गांव-गांव में लोगों ने देखा है कि सुरंग निर्माण, विस्फोट, जलविद्युत परियोजनाओं का विस्तार और भारी सड़क निर्माण कार्य किस प्रकार ढलानों को अस्थिर कर सकते हैं और परिदृश्य को ऐसे बदल सकते हैं जिसकी भरपाई आसान नहीं है।

ऐसी परिस्थितियों में विकास से जुड़े प्रश्न केवल परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह जाते। वे सुरक्षा, अस्तित्व और इस सवाल से जुड़े होते हैं कि क्या पहाड़ स्वयं उस दबाव को सहन कर सकता है जो उस पर डाला जा रहा है।

इसी माहौल में किन्नौर में नेगी का “नो मीन्स नो” आंदोलन आकार लेने लगा। यह आंदोलन केवल एक जलविद्युत परियोजना के खिलाफ विरोध नहीं था। यह उन समुदायों की असहमति का प्रतीक बन गया जो महसूस कर रहे थे कि उनसे ऐसे फैसलों को स्वीकार करने को कहा जा रहा है जो कहीं और लिए गए हैं और जिनमें उनकी जमीन और जीवन को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

जिले के अनेक युवाओं के लिए इस आंदोलन ने एक सरल विचार को आकार दिया—यदि किसी समुदाय को पर्यावरणीय कीमत चुकानी है, तो निर्णय लेने में उसकी वास्तविक भागीदारी भी होनी चाहिए। नेगी ने कहा, “यदि फैसले सीधे गांवों को प्रभावित करते हैं, तो गांवों की भी उन फैसलों में सार्थक भूमिका होनी चाहिए।”

राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बात यह है कि किन्नौर के युवा अब केवल विरोध तक सीमित नहीं हैं। वे लोकतांत्रिक संस्थाओं के भीतर प्रतिनिधित्व भी चाहते हैं।

जनजातीय हिमालयी क्षेत्र में संविधान क्यों महत्वपूर्ण है

यह विचार किन्नौर में संवैधानिक महत्व भी रखता है। जिला संविधान के अनुच्छेद 244 और पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जिनका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों के अधिकारों और शासन व्यवस्था की रक्षा करना है।

इन संवैधानिक प्रावधानों का उद्देश्य स्पष्ट है। जनजातीय समुदायों का भूमि, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों के साथ विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संबंध होता है, जिसे दूर बैठकर लिए गए प्रशासनिक या नियोजन संबंधी फैसलों में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

The Indian Tribal
जीत के बाद माल्यार्पित योवन नेगी (फोटो – तनिषा नेगी)

यही कारण है कि योवन नेगी की जीत केवल एक गांव तक सीमित महत्व नहीं रखती। यह संस्थाओं के बाहर विरोध से संस्थाओं के भीतर भागीदारी की ओर स्पष्ट बदलाव को दर्शाती है।

किन्नौर के अनेक युवाओं के लिए राजनीति अब केवल रैलियों, जनसभाओं या आपत्तियों तक सीमित नहीं रही। यह स्थानीय शासन में प्रवेश कर निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बनने के बारे में भी है। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि पर्यावरणीय चिंता अब लोकतंत्र के बाहर नहीं, बल्कि उसका हिस्सा बन रही है। कई मायनों में यह किन्नौर की राजनीति में व्यापक पीढ़ीगत परिवर्तन को भी दर्शाता है। युवा प्रतिनिधि अब पारिस्थितिकी, संवैधानिक अधिकारों और शासन को अलग-अलग विषयों के रूप में नहीं, बल्कि परस्पर जुड़े मुद्दों के रूप में देख रहे हैं।

संविधान इस परिवर्तन को मजबूत आधार प्रदान करता है। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करता है और समय के साथ न्यायालयों ने इसके अंतर्गत सुरक्षित एवं स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को भी शामिल माना है।

ऐसे जिले में जहां भूस्खलन, अस्थिर ढलानें और क्षतिग्रस्त भूमि लोगों के घरों, खेती और दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं, वहां यह संबंध स्पष्ट दिखाई देता है। जब कोई ढलान धंसती है, तो वह केवल पर्यावरणीय नुकसान नहीं होता, बल्कि जीवन और गरिमा का प्रश्न बन जाता है।

अनुच्छेद 19 भी महत्वपूर्ण है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति व्यक्त करने और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार देता है। जब किन्नौर के ग्रामीण उन परियोजनाओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं जिन्हें वे पहाड़ों के लिए हानिकारक मानते हैं, तो वे लोकतंत्र के बाहर नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का उपयोग कर रहे होते हैं।

अनुच्छेद 14 एक और आयाम जोड़ता है। कानून के समक्ष समानता का अर्थ तब अधूरा रह जाता है जब पहाड़ी समुदाय सबसे अधिक पर्यावरणीय बोझ उठाएं, लेकिन निर्णयों में उनकी भागीदारी सबसे कम हो।

विरोध से प्रतिनिधित्व तक

किन्नौर के युवा इन प्रश्नों का अलग तरीके से उत्तर देना शुरू कर चुके हैं। उन्होंने सड़कों को भूस्खलन से कटते, बागानों को मौसमीय बदलावों से प्रभावित होते और पहाड़ों को निर्माण कार्यों से बदलते देखा है। वे ऐसे क्षेत्र की विरासत संभाल रहे हैं जहां पारिस्थितिक अनिश्चितता दैनिक जीवन का हिस्सा है।

जिले के अनेक युवाओं के लिए स्थानीय चुनाव अब केवल नेतृत्व के पदों तक सीमित नहीं हैं। वे पर्यावरण संरक्षण, प्रतिनिधित्व और सामुदायिक भागीदारी पर खुली बहस के मंच भी बन रहे हैं। यहीं पर “पारिस्थितिक लोकतंत्र” की अवधारणा प्रासंगिक हो जाती है। किन्नौर की बहस का मूल प्रश्न यह है कि क्या नाजुक पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की अपनी भूमि और भविष्य से जुड़े निर्णयों में वास्तविक आवाज है।

The Indian Tribal
किन्नौर की खूबसूरती दर्शाती बस्पा नदी

योवन नेगी की जीत को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है। यह संकेत है कि किन्नौर की राजनीतिक कल्पना बदल रही है।

भूस्खलनों, पर्यावरणीय चिंताओं और “नो मीन्स नो” आंदोलन से प्रभावित एक पीढ़ी अब अलग अपेक्षाओं के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं में प्रवेश कर रही है। वह केवल वादे नहीं, अधिकार चाहती है। वह केवल संवाद नहीं, प्रतिनिधित्व चाहती है। वह ऐसे फैसले चाहती है जो लोगों के साथ मिलकर लिए जाएं, उन पर थोपे न जाएं।

इसलिए नेगी की जीत केवल एक सामान्य पंचायत चुनाव परिणाम नहीं है। यह संकेत देती है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती पर्यावरणीय चिंता जमीनी लोकतंत्र की भाषा को धीरे-धीरे बदल रही है।

शायद रारंग का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है। एक नाजुक पर्वतीय क्षेत्र में लोकतंत्र का आकलन केवल चुनावों से नहीं किया जा सकता। इसका मूल्यांकन इस आधार पर भी होना चाहिए कि क्या समुदायों के पास अभी भी अपनी भूमि, जंगलों और जल स्रोतों की रक्षा करने की शक्ति है, जो जीवन को संभव बनाते हैं।

(लेखिका पंजाब विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में डॉक्टोरल शोधार्थी हैं। व्यक्त विचार उनके निजी हैं।)

Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri

In Numbers

49.4 %
Female Literacy rate of Scheduled Tribes

Update

Tribal quartet from Jharkhand in Asian Games hockey squad

Hockey India has announced the 20-member Indian women's hockey team for the 20th Asian Games, scheduled to be held in Japan from September 19 to October 4. Four tribal players from Jharkhand—captain Salima Tete, Nikki Pradhan, Beauty Dungdung, and Deepika Soreng, have earned their place in the national squad. While all four have previously represented India at the international level, this will be the first Asian Games appearance for Beauty Dungdung and Deepika Soreng, marking a significant milestone in their careers. Midfielder Salima Tete, who will lead the Indian side, has played more than 150 international matches and has been captaining the team for the past two years. Veteran defender Nikki Pradhan, with over 200 international appearances, continues to be a key pillar of India's defensive unit.
The Indian Tribal
Achievers

Decade-Long Endeavour Of This Tribal Farmer Helps Conserve Over 100 Indigenous Paddy Varieties

by The Indian Tribal
July 4, 2026

His initiative demonstrates how tribal knowledge and community participation can help protect native crop diversity for future generations, writes Niroj Ranjan Misra

The Indian Tribal

उत्तर बंगाल के चाय बागानों का संकट: जलवायु परिवर्तन, पलायन और महिलाओं की असुरक्षा का बढ़ता दुष्चक्र

July 2, 2026
The Indian Tribal

सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किये बगैर शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

June 30, 2026
The Indian Tribal

In Palamau Tiger Reserve In Jharkhand, Tribal Traditions Strengthen Big Cat Conservation

June 28, 2026
The Indian Tribal

सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

June 25, 2026
The Indian Tribal

किन्नौर की जनजातीय राजनीति में उभरी नई पर्यावरणीय आवाज, युवा नेतृत्व ने बदली विकास की बहस

June 24, 2026
Previous Post

President Murmu Reviews Project Cheetah, Interacts With Tribal Conservation Volunteers

Next Post

सरना से कोया पुनेम तक: जनगणना 2027 में अलग आदिवासी धर्म श्रेणी की मांग क्यों तेज हुई?

Top Stories

The Indian Tribal
Achievers

Beyond Awards: What Teejan Bai’s Death Means For Indian Folk Culture

July 13, 2026
The Indian Tribal
Achievers

Teejan Bai Changed More Than Pandavani, She Redefined India’s Folk Imagination

July 11, 2026
The Indian Tribal
India

National Stakeholders’ Consultation: Rs One Lakh Crore Investments Pledged For Jharkhand

July 9, 2026
Load More
  • About Us
  • Editor & Writers
  • Contact
  • Redressal
  • Copyright Policy
  • Privacy Policy And Terms Of Use
  • Disclaimer
  • Sitemap

  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Hindi Featured
  • India
  • News
  • Legal
  • Music
  • Sports
  • Trending
  • Chhattisgarh
  • Delhi
  • Gujarat
  • Jammu & Kashmir
  • Jharkhand
  • Kerala
  • Madhya Pradesh
  • Maharashtra
  • North East
  • Arunachal Pradesh
  • Assam
  • Manipur
  • Meghalaya
  • Mizoram
  • Nagaland
  • Sikkim
  • Tripura
  • Odisha
  • Telangana
  • West Bengal
  • Political News
  • Variety
  • Art & Culture
  • Entertainment
  • Adivasi
  • Tribal News
  • Scheduled Tribes
  • हिंदी
  • उपलब्धिकर्ता
  • कानूनी
  • खान पान
  • खेलकूद
  • स्वास्थ्य
  • संस्कृति
  • संगीत
  • विविध
  • कला और संस्कृति
  • खबरें
  • असम की ताज़ा ख़बरें
  • अरुणाचल प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • ओडिशा की ताज़ा ख़बरें
  • केरल की ताज़ा ख़बरें
  • गुजरात की ताज़ा ख़बरें
  • छत्तीसगढ़
  • जम्मू और कश्मीर की ताज़ा ख़बरें
  • झारखंड न्यूज़
  • तेलंगाना की ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • नॉर्थईस्ट की ताज़ा ख़बरें
  • पश्चिम बंगाल की ताज़ा ख़बरें
  • मध्य प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • महाराष्ट्र की ताज़ा ख़बरें
  • त्रिपुरा की ताज़ा ख़बरें
  • नागालैंड की ताज़ा ख़बरें
  • मणिपुर की ताज़ा ख़बरें
  • मिजोरम की ताज़ा ख़बरें
  • मेघालय की ताज़ा ख़बरें
  • सिक्किम की ताज़ा ख़बरें
  • राजस्थान की ताज़ा ख़बरें

About Us

The Indian Tribal is India’s first bilingual (English & Hindi) digital journalistic venture dedicated exclusively to the Scheduled Tribes. The ambitious, game-changer initiative is brought to you by Madtri Ventures Pvt Ltd (www.madtri.com). From the North East to Gujarat, from Kerala to Jammu and Kashmir — our seasoned journalists bring to the fore life stories from the backyards of the tribal, indigenous communities comprising 10.45 crore members and constituting 8.6 percent of India’s population as per Census 2011. Unsung Adivasi achievers, their lip-smacking cuisines, ancient medicinal systems, centuries-old unique games and sports, ageless arts and crafts, timeless music and traditional musical instruments, we cover the Scheduled Tribes community like never-before, of course, without losing sight of the ailments, shortcomings and negatives like domestic abuse, alcoholism and malnourishment among others plaguing them. Know the unknown, lesser-known tribal life as we bring reader-engaging stories of Adivasis of India.

Follow Us

All Rights Reserved

© 2026 Madtri Ventures [P] Ltd.

No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
    • उपलब्धिकर्ता
    • खान पान
    • कानूनी
    • खेलकूद
    • खेलकूद
    • संगीत
    • संगीत
    • स्वास्थ्य
    • स्वास्थ्य
    • विविध
  • Gallery
  • Videos

© 2026 Madtri Ventures [P] Ltd.