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Home » द इंडियन ट्राइबल / हिंदी » द इंडियन ट्राइबल / खबरें » झारखण्ड में विद्यार्थियों को ई-साइकिल देने की तैयारी, कौशल विकास को भी व्यवहारिक बनाने पर मुख्यमंत्री का ज़ोर

झारखण्ड में विद्यार्थियों को ई-साइकिल देने की तैयारी, कौशल विकास को भी व्यवहारिक बनाने पर मुख्यमंत्री का ज़ोर

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने योजनाओं के पारदर्शी, समयबद्ध और परिणामोन्मुख क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। The Indian Tribal की रिपोर्ट

June 1, 2026
The Indian Tribal

कल्याण विभाग की समीक्षात्मक बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

रांची

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की समीक्षात्मक बैठक आज संपन्न हुई। बैठक में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं पहलों की अद्यतन प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति, प्रमुख उपलब्धियों, चुनौतियों तथा भावी कार्ययोजना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री ने योजनाओं के प्रभावी एवं परिणामोन्मुख संचालन पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी, समयबद्ध एवं लक्ष्य आधारित ढंग से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर रहे व्यक्ति तक पहुंचे तथा कोई भी पात्र लाभुक इन योजनाओं से वंचित न रहे। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु उन्होंने विभागीय स्तर पर आपसी समन्वय को और सुदृढ़ करने, योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने तथा जमीनी स्तर पर गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।

विभिन्न योजनाओं की प्रगति की हुई समीक्षा

समीक्षा के क्रम में ई-कल्याण पोर्टल के संचालन एवं उसकी प्रभावशीलता, प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत लाभुकों को दी जा रही सहायता, मरांग गोमके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा हेतु प्रदान की जा रही सुविधाओं, साइकिल वितरण योजना की प्रगति, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयासों तथा परीक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई।

इस दौरान योजनाओं की वर्तमान प्रगति, लाभुकों की संख्या, क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों तथा उनके समाधान के उपायों पर भी विस्तार से समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत लाभान्वित लाभुकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने लाभुकों से योजना के अंतर्गत प्राप्त ऋण, संचालित व्यवसाय, उससे हो रही आय, रोजगार सृजन की स्थिति तथा बैंकिंग प्रक्रियाओं से संबंधित अनुभवों की विस्तृत जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह जानने का प्रयास किया कि लाभुकों को व्यवसाय संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं हो रही है तथा बैंकिंग संस्थानों द्वारा उन्हें समुचित सहयोग मिल रहा है या नहीं।

संवाद के दौरान लाभुकों ने योजना के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना उनके लिए आत्मनिर्भर बनने का एक सशक्त माध्यम साबित हुई है। उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्वरोजगार स्थापित कर न केवल अपनी आजीविका सुदृढ़ कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के अंतर्गत प्राप्त लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पात्र लाभुकों को समय पर योजना का लाभ मिल सके। साथ ही उन्होंने लाभुकों के लिए नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था सुदृढ़ करने पर जोर दिया, जिससे वे अपने व्यवसाय को बेहतर ढंग से संचालित कर सकें।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने लाभुकों से निरंतर संवाद एवं फीडबैक प्राप्त करने के उद्देश्य से कॉल सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से लाभुकों की समस्याओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा सकेगी तथा आवश्यकतानुसार उन्हें मार्गदर्शन एवं सहायता भी उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे योजना का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख हो सके।

अल्पसंख्यक एवं एकलव्य विद्यालयों की समीक्षा

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान गढ़वा, देवघर एवं साहिबगंज जिलों में निर्मित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने इन विद्यालयों में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों, आधारभूत संरचना, छात्र-छात्राओं की नामांकन स्थिति तथा संचालन व्यवस्था की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और निर्देश दिया कि इन संस्थानों का संचालन उच्च गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।

इसके साथ ही राज्य में स्वीकृत एवं संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता, आवासीय सुविधाएं, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन छात्रावासों एवं आदिवासी हॉस्टलों की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि इन सभी संस्थानों में स्वच्छ पेयजल, बिजली, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों एवं हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वस्थ एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने एनजीओ संचालित आश्रम विद्यालयों एवं अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विद्यालयों के प्राचार्यों से संवाद कर उन्होंने संचालन व्यवस्था, अवसंरचना एवं प्रबंधन से संबंधित जानकारी भी प्राप्त की।

एसआईआर और जनगणना को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से निर्देश दिया कि विद्यालयों में विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को एसआईआर (Special Intensive Revision) एवं जनगणना से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इन विषयों के प्रति जागरूक कर उन्हें समाज में सूचना के वाहक के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे वे अपने परिवार एवं समुदाय को भी इन महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक कर सकें।

इसके लिए विद्यालय स्तर पर कार्यशालाएं, जागरूकता सत्र एवं विशेष अभियान संचालित किए जाने पर भी जोर दिया गया।

विद्यार्थियों को ई-साइकिल देने की तैयारी

साइकिल वितरण योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वर्तमान आवश्यकताओं एवं बदलते परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को पारंपरिक साइकिल के स्थान पर ई-साइकिल उपलब्ध कराने हेतु एक समन्वित एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने इस दिशा में कल्याण विभाग, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा उद्योग विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के दूरस्थ, ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के लिए विद्यालय तक पहुंच एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसी स्थिति में ई-साइकिल जैसी सुविधा उपलब्ध कराना न केवल उनकी शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाएगा, बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना का लाभ पात्र विद्यार्थियों को समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो।

कौशल विकास कार्यक्रमों को व्यावहारिक बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कार्यक्रमों को स्थानीय आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों एवं रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप पुनर्संरचित एवं सुदृढ़ किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर व्यावहारिक, परिणामोन्मुख एवं बाजार की मांग के अनुरूप होने चाहिए, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को वास्तविक रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र विशेष आधारित कौशल प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि उद्योगों, स्थानीय उद्यमों एवं सेवा क्षेत्रों के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाएं, जिनसे युवाओं को प्रशिक्षण के उपरांत तुरंत रोजगार या स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें।

जिला अस्पतालों में हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश

कल्याण विभाग द्वारा संचालित अस्पतालों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को और बेहतर बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि रिम्स सहित राज्य के सभी जिला अस्पतालों में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के मरीजों की सुविधा के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएं।

इन हेल्प डेस्क पर संबंधित वर्ग के प्रशिक्षित कर्मियों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को पंजीकरण, परामर्श, जांच एवं उपचार की प्रक्रिया में आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सकेगा।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक एवं पारंपरिक सामुदायिक संरचनाओं से जुड़ी विभिन्न विकास योजनाओं की समीक्षा करते हुए कब्रिस्तान घेराबंदी कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि संबंधित समुदायों को आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने मांझी, परगना, पड़हा, मानकी-मुंडा एवं धुमकुड़िया भवनों के निर्माण कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराया जाए। उन्होंने कहा कि ये भवन पारंपरिक सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बैठक में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव कृपानंद झा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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आईएचएम रांची की ‘मडुआ लड्डू’ कृति को मिला कॉपीराइट पंजीकरण

इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग टेक्नोलॉजी एंड अप्लाइड न्यूट्रिशन, रांची (आईएचएम रांची) ने शोध, नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के कॉपीराइट कार्यालय ने संस्थान द्वारा विकसित “मडुआ लड्डू” शीर्षक कृति को कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अंतर्गत औपचारिक रूप से पंजीकृत किया है। इसके लिए आवेदन 16 मई 2026 को दाखिल किया गया था तथा पंजीकरण प्रमाणपत्र 22 जुलाई 2026 को जारी किया गया। यह कृति आईएचएम रांची के प्राचार्य डॉ. भूपेश कुमार, वरिष्ठ व्याख्याता रवि कुमार तथा व्याख्याता रजनीश कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। झारखंड के घर-घर में लोकप्रिय मडुआ आधारित पारंपरिक व्यंजन को सुव्यवस्थित, मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से दस्तावेजीकृत विधि में प्रस्तुत करना इस कार्य की प्रमुख विशेषता है। मडुआ, जिसे रागी या फिंगर मिलेट के नाम से भी जाना जाता है, झारखंड की खाद्य संस्कृति का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। पोषण की दृष्टि से उपयोगी होने के साथ-साथ यह कम पानी में उगने वाली जलवायु-अनुकूल फसल भी है। ऐसे में मडुआ आधारित उत्पादों के वैज्ञानिक विकास और दस्तावेजीकरण से स्थानीय खाद्य परंपराओं के संरक्षण, पोषण संवर्धन, उद्यमिता और रोजगार सृजन की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। आईएचएम रांची लंबे समय से झारखंड के स्थानीय अनाजों, जनजातीय खाद्य परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक आतिथ्य शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।
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