खरसावां
खरसावां गोलीकांड की 78वीं शहादत दिवस पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखण्ड सरकार की ओर से ऐलान करते हुए कहा कि खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों की पहचान और सम्मान के लिए एक विशेष आयोग का गठन किया जाएगा। यह आयोग सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता से शहीद परिवारों की पहचान कर उन्हें उचित मान-सम्मान और सहायता सुनिश्चित करेगा।
शहीद पार्क, खरसावां में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा यह आयोग सभी दस्तावेजों, ऐतिहासिक अभिलेखों और स्थानीय परंपराओं के आधार पर शहीद परिवारों की पहचान करेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उन परिवारों को उचित सम्मान, मान्यता और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना है, जिन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए।
मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार की प्राथमिकता के रूप में रेखांकित करते हुए कहा, “हमारा यह नैतिक दायित्व है कि जिनकी कुर्बानी से झारखंड की अस्मिता और स्वतंत्र पहचान बची, उनके वंशजों को गर्व और सम्मान के साथ जीने का अवसर मिले।” उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष तक सभी शहीद परिवारों की शिनाख्त कर समारोहपूर्वक सम्मानित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह पहल केवल श्रद्धांजलि मात्र नहीं, बल्कि एक इतिहास-संरक्षण अभियान है। इस अभियान से युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान की जानकारी मिलेगी तथा उनमें राज्य के प्रति आत्मसम्मान की भावना प्रबल होगी। राज्य सरकार ने पहले भी स्वतंत्रता सेनानियों, आंदोलनकारियों एवं शहीदों के परिजनों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। अब खरसावां के वीरों के प्रति यह संवेदनशील कदम झारखंड की पहचान को और सशक्त करेगा।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “हमारा संघर्ष जीवित रहेगा, जब तक हर शहीद के परिवार को उसका सम्मान नहीं मिल जाता। यही हमारे राज्य की असली दिशा और पहचान है।” इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक (शहीद बेदी) और वीर शहीद केरसे मुंडा चौक स्थित शहीद स्मृति-चिह्न पर पुष्प अर्पित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
1 जनवरी 1948 को तत्कालीन खरसावां का उड़ीसा राज्य में विलय के विरोध में इकट्ठे हुए हजारों आदिवासियों पर पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें कई लोग मारे गए। आधिकारिक तौर पर 35 आदिवासियों के मरने की पुष्टि की गयी हालांकि अलग-अलग आंकड़ों के मुताबिक मृतकों की संख्या कई गुना ज्यादा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा, “झारखंड की मिट्टी शहादत की गाथाओं से भरी है। जितना समृद्ध इतिहास हमारे राज्य का है, उतना किसी अन्य प्रदेश का नहीं।” उन्होंने कहा कि अनगिनत लोगों ने आदिवासी अस्मिता और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। “हम लड़े हैं, तभी बचे हैं। हमारे वीर सपूतों ने कभी हार नहीं मानी,” मुख्यमंत्री ने कहा।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने झारखंड आंदोलन के पथप्रदर्शक शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि गुरुजी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे, जिन्होंने आदिवासी समाज को आत्मसम्मान और संवैधानिक पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि गुरुजी का संघर्ष आज भी राज्य के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्यमंत्री ने पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि इससे ग्रामसभा और ग्रामीण स्वशासन सशक्त होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार झारखंड के 25वें स्थापना वर्ष को विकास, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के नए दौर के रूप में आगे बढ़ा रही है।
हेमन्त ने कहा कि झारखंड राज्य को बने 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं और अब यह युवा झारखंड विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से शहीदों के आदर्शों पर चलकर झारखंड के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।















