रांची
झारखंड के 100 से अधिक आदिवासी, मूलवासी एवं जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने 24 मई को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले “जनजातीय सांस्कृतिक समागम” के बहिष्कार की अपील की है। बुधवार को जारी संयुक्त बयान में संगठनों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की मूल अवधारणा आदिवासी विरोधी है तथा इससे आदिवासी समुदाय की स्वतंत्र सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
बहिष्कार की अपील करने वाले संगठनों में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, गांव गणराज्य परिषद, सरना संगम समिति, आदिवासी मुंडा महासंघ, आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी मूलवासी अधिकार मंच बोकारो, भारत जकत माझी परगना महल रामगढ़, पारंपरिक ग्रामसभा खूंटी, आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद, आतू सुसर समिति, संयुक्त ग्रामसभा, युवा झुमुर, आदिवासी पाहन बाबा सेवा समिति, हो लेखक संघ, आदिवासी समन्वय समिति, ग्राम प्रधान संघ, झारखंड जनाधिकार महासभा, जोहार एवं ओमोन महिला संगठन सहित कई प्रमुख संगठन शामिल हैं।
संगठनों की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि आयोजक “जनजाति सुरक्षा मंच” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़ा संगठन है, जो आदिवासियों को हिंदू समाज और वर्ण व्यवस्था का हिस्सा मानता है। बयान में कहा गया कि संबंधित संगठन “आदिवासी” शब्द के बजाय “वनवासी” शब्द का प्रयोग करते हैं, जो आदिवासी समाज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास है।
अपील में यह भी आरोप लगाया गया कि आयोजन से जुड़े कुछ संगठन “सरना-सनातन एक” जैसे नारों के माध्यम से आदिवासी समुदाय की अलग धार्मिक पहचान समाप्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं। संगठनों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े संघर्षों में ऐसे संगठन कभी आदिवासी समाज के साथ खड़े नहीं दिखे।
बहिष्कार की अपील जारी करने वालों में झारखंड की पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक, मंगल सिंह बोबोंगा, देवकीनंद बेदिया, कुमारचंद्र मार्डी, गुंजल इकिर मुंडा, डेमका सोय, रमेश जराई, रजनी मुर्मू, नितिशा खलखो, आलोका, कृष्णा मार्डी, बिंसाय मुंडा, प्रबल महतो, मिनाक्षी मुंडा, मुकेश बिरुआ, हरी कुमार भगत, दिनेश मुर्मू, सनिका मुंडा, ज्योत्सना तिर्की, साधु हो, सुनिता लकड़ा तथा जयकिशन गोडसोरा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और प्रतिनिधि शामिल हैं।
क्या होगा 24 मई को?
24 मई को नई दिल्ली के लाल किला मैदान में “जनजातीय सांस्कृतिक समागम” आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर रखा गया है और इसमें देशभर की 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के लगभग 1.5 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है।
आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य जनजातीय संस्कृति, परंपरा और भगवान बिरसा मुंडा की विरासत का सम्मान करना है। कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा, सांस्कृतिक झांकियां और दिल्ली में पांच अलग-अलग स्थानों से निकलने वाली विशाल शोभायात्राएं होंगी, जो लाल किले पर जाकर मिलेंगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि होंगे।
















