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Home » द इंडियन ट्राइबल / हिंदी » विविध » हताशा से आत्मविश्वास तक: दो शारीरिक रूप से अक्षम आदिवासियों की प्रेरक कहानी

हताशा से आत्मविश्वास तक: दो शारीरिक रूप से अक्षम आदिवासियों की प्रेरक कहानी

ओडिशा के दो कोंध आदिवासियों के लिए ज़िंदगी तब पूरी तरह बदल गई जब बचपन में ही उन्होंने अपने अंगों की गतिशीलता खो दी। इससे वे गहरे अवसाद और निराशा में डूब गए। नीरोज रंजन मिश्र बता रहे हैं की अचानक ऐसा क्या हुआ कि जिससे उनकी ज़िंदगी की दिशा सकारात्मकता में पलट गई।

July 18, 2025
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अजया के दूकान पर ग्राहक

भुवनेश्वर

“विकलांगता कभी अक्षमता नहीं होती, यदि कोई धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य का पीछा करे।” ओडिशा के कंधमाल ज़िले के दरिंगबाड़ी ब्लॉक के कोंध जनजाति के शारीरिक रूप से अक्षम सलमान प्रधान और अजय मुठा माझी समेत आठ अन्य व्यक्तियों ने अपने जीवन से यही साबित किया है।

सलमान और अजय, जिन्होंने बचपन में ही अपने अंगों की गतिशीलता खो दी थी, अब पीड़ा और यातना के दलदल से बाहर निकलकर अपने जीवन की दिशा बदल चुके हैं। उन्होंने अपने परिवारों पर बोझ बनने की ‘कलंक’ और ‘व्यथा’ से निजात पाई है। अब सलमान की सौर ऊर्जा चालित ट्राइसाइकिल, जिसमें एक छोटा प्रिंटर-फोटोकॉपी मशीन लगी है, उन्हें “संतोषजनक” आमदनी दे रही है।

“अब मेरी मोबाइल ट्राइसाइकिल ‘ज़ेरॉक्स शॉप’, जो सौर ऊर्जा से चलती है, मेरे क्षेत्र की गलियों और उपगलियों में घूमती है और मुझे प्रतिदिन औसतन ₹100 की आमदनी देती है। यह विशेष ट्राइसाइकिल मुझे गैर-सरकारी संस्था कंधमाल ज़िला सबुजा वैद्य संगठन (KZSVS) द्वारा दरिंगबाड़ी मुख्यालय में दी गई थी। इसने मुझे गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर दिया,” — ऐसा The Indian Tribal को बताया स्कूल छोड़ चुके सलमान ने, जो दरिंगबाड़ी ब्लॉक के लांबाबंधा गांव से हैं, परंतु अब अपने पिता के साथ पलिहेरी पंचायत मुख्यालय में रहते हैं।

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सलमान अपने सौर ऊर्जा-चलित ज़ेरॉक्स शॉप में

कक्षा पाँच तक सलमान को पलिहेरी प्राथमिक विद्यालय का सबसे तेज़ धावक माना जाता था। सातवीं कक्षा में जब वह जगतज्योति मध्य अंग्रेज़ी विद्यालय, दरिंगबाड़ी में पढ़ते थे, तो रोज़ आठ किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाते थे। 2003 में, वह बुखार से पीड़ित हो गए। धीरे-धीरे उनकी टांगों की गति क्षीण होने लगी। उन्होंने लकड़ी के बैसाखी के सहारे चलने की कोशिश की, लेकिन 2010 तक उनकी टांगें पूरी तरह निष्क्रिय हो गईं और वह ‘आजीवन गतिशीलता अक्षमता’ के शिकार हो गए। अब वे दैनिक कार्यों के लिए माता-पिता पर निर्भर हो गए।

लगभग चार महीने पहले, एक परिचित के माध्यम से उनकी मुलाक़ात दिनबंधु महाराणा से हुई, जो KZSVS के संस्थापक हैं। इस मुलाकात ने सलमान के जीवन में नई उम्मीद जगाई। उन्हें सौर ऊर्जा चालित ट्राइसाइकिल ज़ेरॉक्स शॉप दी गई। अब सलमान अपने किसान पिता की सालाना ₹20,000 की आमदनी में अपनी छोटी सी आय से सहारा दे रहे हैं।

सलमान अब सुबह जल्दी उठते हैं, अपनी ट्राइसाइकिल की चेन में तेल डालते हैं और रोज़ी-रोटी की तलाश में निकल पड़ते हैं। हर सप्ताह वे अपनी दुकान का रास्ता बदलते हैं ताकि विभिन्न ग्राहकों तक पहुँच सकें।

सलमान की तरह, अजय को भी दस वर्ष की उम्र में दर्दनाक अनुभव से गुज़रना पड़ा, जब उनकी बाईं टांग और दाहिना हाथ धीरे-धीरे पूरी तरह निष्क्रिय हो गए। उन्होंने रेंगते हुए चलना सीखा, जो वे आज भी करते हैं। प्रारंभ में वे मानसिक अवसाद और हताशा में डूबे रहते थे, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे ख़ुद को संभाला और 2024 में अपना जन सेवा केंद्र (JSK) स्थापित करने का निर्णय लिया।

उन्होंने एक प्रमुख स्थान पर एक मकान किराए पर लेने का निश्चय किया, जहाँ उनका JSK आधार कार्ड, पासपोर्ट आवेदन जैसे आवश्यक डिजिटल सेवाएं प्रदान कर अच्छी आमदनी दे सके। लेकिन एक समस्या आ खड़ी हुई—उस मकान पर ₹32,000 का लंबित बिजली बिल था, जिसे पिछले किरायेदार ने कभी नहीं चुकाया था। बिजली विभाग ने वहां की बिजली आपूर्ति काट दी।

निराश अजय ने अपना सपना छोड़ने की ठान ली। लेकिन ऐसे समय में KZSVS उनकी सहायता के लिए आगे आया। संस्था ने न केवल तहसील कार्यालय के पास एक नया मकान दिलवाया, बल्कि उसे सौर पैनल, कंप्यूटर, बैटरी और इन्वर्टर से सुसज्जित भी किया। यह काम 2025 की शुरुआत में पूरा हुआ।

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अजया अपने सहायक के साथ

“SELCO (Solar Electric Light Company) Foundation के सहयोग से हमने ट्राइसाइकिल ज़ेरॉक्स शॉप तैयार किए और दो शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को उपहार स्वरूप दिए। इसके अलावा, आठ अन्य जन सेवा केंद्रों को सौर ऊर्जा चालित बनाने का कार्य किया। अब हमारा लक्ष्य है कि 1,800 दिव्यांगजनों को ऐसी सुविधा दी जाए,” — ऐसा कहा KZSVS के संस्थापक दिनबंधु महाराणा ने, जिन्हें ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा ‘युवा प्रतिभा सम्मान’ मई में दिया गया।

“हमने प्रत्येक प्रिंटर-फोटोकॉपी मशीन को 140 वाट के सौर पैनल से युक्त किया, जिसकी लागत लगभग ₹1.30 लाख आई। इसी तरह कई JSK में लगाए गए सौर पैनलों की लागत ₹1 लाख प्रति किलोवाट आई,” SELCO Foundation के वरिष्ठ सलाहकार गौतम प्रधान ने बताया।

KZSVS और SELCO Foundation ने इस पूरे परोपकारी प्रोजेक्ट को संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया, जिससे दरिंगबाड़ी ब्लॉक के सलमान और अजय जैसे लोग आत्मनिर्भर बन सकें।

अजय ने इन संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा—“KZSVS और SELCO Foundation मेरे लिए वरदान बनकर आए। उन्हीं की वजह से आज मैं कमाने के लायक बना हूँ। मैंने अपने दो रिश्तेदार—एक लड़की और एक लड़के को भी अपने JSK में काम पर रखा है। वे तनख्वाह नहीं लेते, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर मैं उनके खर्चे पूरे करता हूँ।”

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49.4 %
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Update

Centre notifies Act mandating political reservation for tribals in Goa Assembly

The Centre has notified the Act that grants political reservation for the Scheduled Tribe (ST) community in the 40-member Goa legislative Assembly. The Act passed earlier by Parliament mandates reservation of four seats for tribal candidates in the Goa Assembly for the first time. Goa Chief Minister Pramod Sawant recently met Union Home Minister Amit Shah urging him to expedite the process of reservation for the ST community in the Assembly, which will go to polls early next year. Sawant expressed his “deep gratitude” to Prime Minister Narendra Modi and Home Minister Amit Shah. Tribal leader and BJP MLA Govind Gaude called it a big victory of social justice movement.
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‘ट्री ऑफ लाइफ’ सखुआ: पत्तों से रोजगार, बीजों से उद्योग, राल से औषधि और संरक्षण में छिपा भविष्य

by The Indian Tribal
August 6, 2026

यह वृक्ष केवल जंगलों की शान नहीं, बल्कि आदिवासी जीवन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पारंपरिक चिकित्सा, जैव विविधता और जलवायु सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार माना जाता है। The Indian Tribal की रिपोर्ट भाग-2

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रांची से उठेगी सखुआ क्रांति: क्यों है सखुआ झारखंड की संस्कृति, आस्था और प्रकृति का प्रहरी?

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How Dhimsa Danced Its Way Into Guinness World Records In Bhogapuram

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The Indian Tribal is India’s first bilingual (English & Hindi) digital journalistic venture dedicated exclusively to the Scheduled Tribes. The ambitious, game-changer initiative is brought to you by Madtri Ventures Pvt Ltd (www.madtri.com). From the North East to Gujarat, from Kerala to Jammu and Kashmir — our seasoned journalists bring to the fore life stories from the backyards of the tribal, indigenous communities comprising 10.45 crore members and constituting 8.6 percent of India’s population as per Census 2011. Unsung Adivasi achievers, their lip-smacking cuisines, ancient medicinal systems, centuries-old unique games and sports, ageless arts and crafts, timeless music and traditional musical instruments, we cover the Scheduled Tribes community like never-before, of course, without losing sight of the ailments, shortcomings and negatives like domestic abuse, alcoholism and malnourishment among others plaguing them. Know the unknown, lesser-known tribal life as we bring reader-engaging stories of Adivasis of India.

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