आदिवासी समुदायों में पारंपरिक दाइयों की भूमिका क्यों अब भी कायम है, जब सरकार संस्थागत प्रसव पर दे रही है जोर?
हमने हाल ही में "आदिवासी दाइयों का सम्मान: जीवन और कल्याण की सुरक्षा" विषय के साथ विश्व के आदिवासी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया। अर्चना ज्योति दो अध्ययनों के जरिए यह बताती हैं कि आदिवासी समुदायों में पारंपरिक दाइयाँ अब भी क्यों अपरिहार्य बनी हुई हैं
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