• About
  • Contact
  • Sitemap
  • Gallery
No Result
View All Result
Vacancies
Wednesday, February 4, 2026
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    बाघों का खौफ और शादी का संकट: क्या पलायन ही गोंड आदिवासियों का एकमात्र विकल्प है?

    The Indian Tribal

    मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा: जिसने भारत को आदिवासी चेतना दी

    The Indian Tribal

    क्या एकरूपता की मांग में टिक पाएगी डोंगरिया कोंध शॉल?

    The Indian Tribal

    बीज, मिट्टी और गीतों के ज़रिये जैविक खेती मिशन पर है यह आदिवासी किसान

    The Indian Tribal

    यह दुर्लभ सुपरफूड जनजातीय खानपान और स्वास्थ्य का सदियों पुराना आधार है

    The Indian Tribal

    हम लड़े हैं, तभी बचे हैं: खरसावां शहीद दिवस पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    पेसा कानून की जानकारी सभी को रखने की आवश्यकता: हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    लम्बा इंतज़ार खत्म, झारखण्ड में आखिरकार पेसा नियमावली को मिली मंजूरी

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    बाघों का खौफ और शादी का संकट: क्या पलायन ही गोंड आदिवासियों का एकमात्र विकल्प है?

    The Indian Tribal

    मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा: जिसने भारत को आदिवासी चेतना दी

    The Indian Tribal

    क्या एकरूपता की मांग में टिक पाएगी डोंगरिया कोंध शॉल?

    The Indian Tribal

    बीज, मिट्टी और गीतों के ज़रिये जैविक खेती मिशन पर है यह आदिवासी किसान

    The Indian Tribal

    यह दुर्लभ सुपरफूड जनजातीय खानपान और स्वास्थ्य का सदियों पुराना आधार है

    The Indian Tribal

    हम लड़े हैं, तभी बचे हैं: खरसावां शहीद दिवस पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    पेसा कानून की जानकारी सभी को रखने की आवश्यकता: हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    लम्बा इंतज़ार खत्म, झारखण्ड में आखिरकार पेसा नियमावली को मिली मंजूरी

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
No Result
View All Result
The Indian Tribal
No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
  • Gallery
  • Latest News
Vacancies
Home » द इंडियन ट्राइबल / हिंदी » द इंडियन ट्राइबल / खबरें » लम्बा इंतज़ार खत्म, झारखण्ड में आखिरकार पेसा नियमावली को मिली मंजूरी

लम्बा इंतज़ार खत्म, झारखण्ड में आखिरकार पेसा नियमावली को मिली मंजूरी

काफी समय से प्रतीक्षित पेसा नियमावली को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्ष्ता वाली मंत्री परिषद ने आज अपना अनुमोदन दिया। अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को एवं जनजातीय समुदायों को और अधिक अधिकार और स्वायत्तता मिलने का रास्ता साफ हुआ। The Indian Tribal की रिपोर्ट

December 23, 2025
The Indian Tribal

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन मीडिया को कैबिनेट की पेसा पर निर्णय की जानकारी देते हुए

रांची

झारखण्ड सरकार ने आज 23 दिसंबर को राज्य के जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए पेसा नियमावली — पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखण्ड नियमावली, २०२५ — की गठन की स्वीकृति दी। अधिसूचना जारी होते ही राज्य के अनुसूचित क्षेत्र में पेसा एक्ट लागू होगा और इसके दायरे में 15 जिले होंगे।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘पेसा नियमावली’ को औपचारिक मंजूरी मिलने के उपरान्त कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने जानकारी दी कि इस कानून के लागू होने से ग्राम सभाएं अब पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली होंगी। नए नियमों के तहत ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में खनन अधिकार, भूमि अधिग्रहण और वन भूमि से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा। योजना बनाने में ग्राम सभा की भूमिका होगी। पारंपरिक ग्राम सभाओं को अधिकार दिया गया है। सभी ग्राम सभा अपने परंपरा को अधिसूचित करेगी।  कैबिनेट की बैठक में कुल 39 प्रस्तावों पर मुहर लगी है।

“आज पूरे कैबिनेट का एक महत्वपूर्ण विषय था पेसा को लेकर। आज हमने पेसा एक्ट किस तरीके से लागू हो इसको लेकर न्यायमवाली बनायीं।  बहुत लोगों से विमर्श करते हुए और विभिन्न विभागों से मंतव्य लेते हुए यह आज आखिरकार राज्य की जनता को समर्पित होगा। इसको बेहतर से बेहतर तरीके से पूरे राज्य में विशेष कर जहाँ अनुसूचित क्षेत्र हैं वहां विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए धरातल पर उतारा जायेगा, ” मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पत्रकारों से कहा।

The Indian Tribal
झारखण्ड मंत्रालय

संक्षिप्त में: क्या है पेसा कानून?

  • पेसा कानून यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 को इसलिए लाया गया क्योंकि सामान्य पंचायत कानून आदिवासी समाज की सामाजिक संरचना, परंपराओं और सामुदायिक स्वामित्व की भावना से मेल नहीं खाता था। संविधान निर्माताओं ने माना कि आदिवासी इलाकों में निर्णय ऊपर से नहीं, बल्कि ग्राम सभा से नीचे से ऊपर होने चाहिए। पेसा इसी सोच को कानूनी रूप देता है।
  • कानून की मूल सोच:आदिवासी इलाकों में शासन का केंद्र जिला या राज्य नहीं, बल्कि ग्राम सभा होगी। विकास कार्यों या खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति अनिवार्य होगी, जिससे ग्रामीण और आदिवासी समाज अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा खुद कर सकेंगे।
  • भारत में 10 राज्यों में अनुसूचित क्षेत्र हैं: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान

पेसा की वैचारिक जड़ें: आदिवासी समाज की परंपरा

भारत के आदिवासी समाज में सदियों से ग्राम सभा जैसी सामूहिक व्यवस्था मौजूद रही है।

  • मुंडा समाज में पड़हा व्यवस्था
  • गोंड समाज में ग्राम परिषद
  • संथालों में मांझी-परगना प्रणाली

इन व्यवस्थाओं में:

  • जमीन सामूहिक मानी जाती थी
  • फैसले गांव की खुली सभा में होते थे
  • राजा या राज्य की दखल न्यूनतम होती थी

क्या पेसा से आदिवासियों को वास्तविक लाभ हुआ? (हाँ, कुछ उदाहरण)

शराबबंदी – ओडिशा और महाराष्ट्र

  • कई आदिवासी ग्राम सभाओं ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया
  • घरेलू हिंसा और गरीबी में कमी आई
  • महिलाओं की भूमिका मजबूत हुई

लघु वन उपज – महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़

  • तेंदूपत्ता, महुआ, साल बीज पर ग्राम सभा का नियंत्रण
  • बिचौलियों की भूमिका कम हुई
  • आदिवासियों की आय में सीधी बढ़ोतरी हुई

खनन विरोध – ओडिशा के आदिवासी इलाके

  • ग्राम सभाओं ने खनन प्रस्तावों को खारिज किया
  • जंगल, जलस्रोत और आजीविका की रक्षा हुई
  • यह पेसा की शक्ति का सबसे सशक्त उदाहरण माना जाता है

पेसा कानून आदिवासियों के लिए संविधान का सबसे शक्तिशाली औज़ार है। लेकिन जब तक सरकारें ग्राम सभा को सच में निर्णय लेने नहीं देंगी, तब तक यह कानून कागज़ से आगे नहीं बढ़ पाएगा।

झारखण्ड उच्च न्यायलय की दबिश

Jharkhand High Court | The Indian Tribal
झारखण्ड उच्च न्यायलय

झारखण्ड उच्च न्यायलय ने 9 सितंबर को पेसा नियम बनाए जाने तक राज्य सरकार द्वारा लघु खनिज खदानों की नीलामी की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक पेसा के तहत नियम नहीं बनाए जाते, तब तक किसी भी प्रकार का आवंटन नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा, “आप पहले नियम अधिसूचित करें, उसके बाद हम आवंटन की अनुमति देंगे।”न्यायलय ने आपत्ति ज़ाहिर करते जुए कहा था कि राज्य सरकार अब तक पेसा के तहत नियम बनाने और उन्हें अधिसूचित करने संबंधी न्यायलय के निर्देशों का पालन नहीं कर पाई है।

मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि संबंधित विभाग द्वारा पेसा नियमावली से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और इसे कैबिनेट के समक्ष स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है। सरकार ने इस आधार पर मामले में अतिरिक्त समय की मांग की। सरकार का कहना था कि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही संभव है, इसलिए कुछ और समय दिया जाए। अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया। न्यायालय ने सरकार को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 13 जनवरी 2026 निर्धारित कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में राज्य सरकार को इस संबंध में हुई प्रगति और वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी अदालत के समक्ष रखनी होगी।

‘पेसा कानून लागू करना सरकार की प्राथमिकता’

इस बीच, ऑड्रे हाउस में आयोजित दो दिवसीय “नाची से बाची” जनजातीय स्वशासन महोत्सव का उद्घाटन करते हुए ग्रामीण विकास सह पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखण्ड में पेसा कानून लागू करना सरकार की प्राथमिकता है और हमारी सरकार बहुत तेजी से पेसा कानून लागू करने की दिशा में प्रयासरत है, लोगों से मिले सुझाव पर हमने विचार कर सारा मसला कैबिनेट को समर्पित कर दिया है ।

THe Indian tribal
जनजातीय स्वशासन महोत्सव में ग्रामीण विकास सह पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह व अन्य

मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ऐसा  पेसा कानून पेश करेगी जिससे पूरा देश झारखण्ड का उदाहरण पेश कर सकेगा । उन्होंने कहा कि सुशासन सुनिश्चित होना चाहिए। ग्राम सभा को सशक्त किया जा रहा है । हम लोग किसी व्यक्ति विशेष को सुरक्षित न कर समूह को सुरक्षित करने की दिशा में प्रयासरत है। ग्राम सभा में हर समाज के लोगों को अपनी बातें रखने का अधिकार होगा।  उन्होंने कहा की स्वशासन लागू कर हमलोग दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सपनों को पूरा कर पाएंगे। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर पेसा कानून को लागू कर सुशासन को मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है और हम जल्द ही इस मुकाम तक पहुंच  जाएंगे।

निदेशक पंचायती राज राजेश्वरी बी ने कहा कि आज आयोजित हो रहे इस दो दिवसीय स्वशासन महोत्सव में कई तकनीकी सत्र भी होंगे जिसमें पेसा से संबंधित कई पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri

In Numbers

49.4 %
Female Literacy rate of Scheduled Tribes

Update

Meitei CM, Kuki-Zo DyCM in strife-torn Manipur

Yumnam Khemchand Singh, former Speaker and a Minister in the erstwhile Biren Singh government, is set to become the new Chief Minister of Manipur, which is under President’s Rule for the last almost one year. He was elected the BJP legislature party leader at a meeting of party MLAs at the BJP headquarters in Delhi on Tuesday. The CM’s post has been vacant since N Biren Singh resigned on February 9, 2025. Also, to maintain balance in the ethnically divided State, Nemcha Kipgen, a Kuki-Zo MLA from Kangpokpi, is likely to be appointed Deputy Chief Minister. She will be the first woman and the first Kuki-Zo to hold the post. Another Deputy CM is likely to be from the Naga People’s Front, the BJP’s alliance partner. The 60-member State assembly, which has a tenure till 2027, was put under suspended animation. The State has been hit hard by continuing ethnic clashes between the Kuki-Zo and Metei communities that erupted on May 3, 2023 over the issue of proposed reservation to the latter. In the Manipur assembly, BJP has 37 MLAs, supported by its allies Naga People’s Front’s five and JD(U)’s lone legislator. Opposition holds 16 seats, comprising National People’s Party (6), Congress (5), independents (3), and two from KPA.
The Indian Tribal
आदिवासी

क्या एकरूपता की मांग में टिक पाएगी डोंगरिया कोंध शॉल?

by The Indian Tribal
January 28, 2026

GI टैग मिलने के दो साल बाद डोंगरिया कोंध शॉल को वैश्विक पहचान तो मिली, पर उसके साथ एकरूपता की मांग भी बढ़ी। सवाल यह है कि क्या परंपरा बाजार की शर्तों पर टिक पाएगी? The Indian Tribal की रिपोर्ट

The Indian Tribal

बीज, मिट्टी और गीतों के ज़रिये जैविक खेती मिशन पर है यह आदिवासी किसान

January 17, 2026
The Indian Tribal

Skateboarding Transforming Tribal Youth Culture In Gangtok

January 15, 2026
The Indian Tribal

From Sacred Hills To Global Shelves: Can Dongria Shawl Survive Demand For Uniformity?

January 9, 2026
The Indian Tribal

यह दुर्लभ सुपरफूड जनजातीय खानपान और स्वास्थ्य का सदियों पुराना आधार है

January 6, 2026
The Indian Tribal

Tribal Farmer-Cum-Folk Artiste’s Mission To Promote Organic Farming In Odisha

January 4, 2026
Previous Post

Jharkhand Chief Minister Inaugurates Dishom Guru Shibu Soren Coaching Institute For Tribal Medical, Engineering Aspirants

Next Post

Tribal Leaders In Jharkhand Celebrate Approval Of PESA Rules

Top Stories

The Indian Tribal
आदिवासी

बाघों का खौफ और शादी का संकट: क्या पलायन ही गोंड आदिवासियों का एकमात्र विकल्प है?

February 3, 2026
The Indian Tribal
आदिवासी

मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा: जिसने भारत को आदिवासी चेतना दी

January 31, 2026
The Indian Tribal
आदिवासी

क्या एकरूपता की मांग में टिक पाएगी डोंगरिया कोंध शॉल?

January 28, 2026
Load More
  • About Us
  • Contact
  • Team
  • Redressal
  • Copyright Policy
  • Privacy Policy And Terms Of Use
  • Disclaimer
  • Sitemap

  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Hindi Featured
  • India
  • News
  • Legal
  • Music
  • Sports
  • Trending
  • Chhattisgarh
  • Delhi
  • Gujarat
  • Jammu & Kashmir
  • Jharkhand
  • Kerala
  • Madhya Pradesh
  • Maharashtra
  • North East
  • Arunachal Pradesh
  • Assam
  • Manipur
  • Meghalaya
  • Mizoram
  • Nagaland
  • Sikkim
  • Tripura
  • Odisha
  • Telangana
  • West Bengal
  • Political News
  • Variety
  • Art & Culture
  • Entertainment
  • Adivasi
  • Tribal News
  • Scheduled Tribes
  • हिंदी
  • उपलब्धिकर्ता
  • कानूनी
  • खान पान
  • खेलकूद
  • स्वास्थ्य
  • संस्कृति
  • संगीत
  • विविध
  • कला और संस्कृति
  • खबरें
  • असम की ताज़ा ख़बरें
  • अरुणाचल प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • ओडिशा की ताज़ा ख़बरें
  • केरल की ताज़ा ख़बरें
  • गुजरात की ताज़ा ख़बरें
  • छत्तीसगढ़
  • जम्मू और कश्मीर की ताज़ा ख़बरें
  • झारखंड न्यूज़
  • तेलंगाना की ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • नॉर्थईस्ट की ताज़ा ख़बरें
  • पश्चिम बंगाल की ताज़ा ख़बरें
  • मध्य प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • महाराष्ट्र की ताज़ा ख़बरें
  • त्रिपुरा की ताज़ा ख़बरें
  • नागालैंड की ताज़ा ख़बरें
  • मणिपुर की ताज़ा ख़बरें
  • मिजोरम की ताज़ा ख़बरें
  • मेघालय की ताज़ा ख़बरें
  • सिक्किम की ताज़ा ख़बरें
  • राजस्थान की ताज़ा ख़बरें

About Us

The Indian Tribal is India’s first bilingual (English & Hindi) digital journalistic venture dedicated exclusively to the Scheduled Tribes. The ambitious, game-changer initiative is brought to you by Madtri Ventures Pvt Ltd (www.madtri.com). From the North East to Gujarat, from Kerala to Jammu and Kashmir — our seasoned journalists bring to the fore life stories from the backyards of the tribal, indigenous communities comprising 10.45 crore members and constituting 8.6 percent of India’s population as per Census 2011. Unsung Adivasi achievers, their lip-smacking cuisines, ancient medicinal systems, centuries-old unique games and sports, ageless arts and crafts, timeless music and traditional musical instruments, we cover the Scheduled Tribes community like never-before, of course, without losing sight of the ailments, shortcomings and negatives like domestic abuse, alcoholism and malnourishment among others plaguing them. Know the unknown, lesser-known tribal life as we bring reader-engaging stories of Adivasis of India.

Follow Us

All Rights Reserved

© 2024 Madtri Ventures [P] Ltd.

No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
    • उपलब्धिकर्ता
    • खान पान
    • कानूनी
    • खेलकूद
    • खेलकूद
    • संगीत
    • संगीत
    • स्वास्थ्य
    • स्वास्थ्य
    • विविध
  • Gallery
  • Videos

© 2024 Madtri Ventures [P] Ltd.