Monday, February 23, 2026
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बांसवाड़ा की दो सशक्त आदिवासी महिलाएं रच रहीं सामाजिक बदलाव की नई कहानी

दोनों भील महिलाओं ने व्यक्तिगत संघर्षों को सामुदायिक नेतृत्व में बदलकर आदिवासी समाज में स्थायी परिवर्तन की मिसाल पेश की है। विकास मेश्राम बता रहे हैं कैसे जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो पूरा समुदाय सशक्त होता है PART-3

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बेटियों की शिक्षा की बनी ढाल, रोके पाँच बाल विवाह

राजस्थान के भील आदिवासी समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी बाल विवाह और छुआछूत की परंपराओं को चुनौती देकर यह आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बनीं शिक्षा, पोषण और बेटियों की गरिमा की प्रहरी। विकास मेश्राम की रिपोर्ट PART-2

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घूंघट और घर से बाहर निकल नेतृत्व क्षमता की मिसाल बन रही हैं राजस्थान की ये आदिवासी महिलाएं

बांसवाड़ा जिले के पहाड़ी इलाकों में बसे भील-बहुल गांवों में पानी की किल्लत, रोजगार की कमी, अपर्याप्त शिक्षा और पुरानी सामाजिक परंपराओं का बोझ पीढ़ियों से चला आ रहा है। लेकिन इन्हीं चुनौतियों के बीच चार आदिवासी महिलाएं ऐसी उभरी हैं जिन्होंने न सिर्फ अपने जीवन को [...]

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सिक्किम में स्केटबोर्डिंग बना जनजातीय युवाओं की नई पहचान

भूटिया और लेपचा समुदाय के युवा स्केटबोर्डिंग को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति का ज़रिया बना रहे हैं। यह खेल उन्हें अवसाद, नशे और सामाजिक दबावों से बाहर निकलने में मदद कर रहा है। The Indian Tribal की रिपोर्ट

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बाघों का खौफ और शादी का संकट: क्या पलायन ही गोंड आदिवासियों का एकमात्र विकल्प है?

मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिज़र्व के एक छोटे से गांव में दो दर्दनाक बाघ हमलों ने गोंड आदिवासियों की पुनर्वास की इच्छा को और प्रबल कर दिया है। इस बीच वे दैवीय हस्तक्षेप की भी कामना कर रहे हैं। The Indian Tribal की रिपोर्ट

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मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा: जिसने भारत को आदिवासी चेतना दी

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता, संविधान निर्माता और एक प्रखर आदिवासी आवाज़—मरांग गोमके (महान नेता) ने एक ही जीवन में कई भूमिकाएँ निभाईं। The Indian tribal यहाँ उनके अत्यंत समृद्ध जीवन-यात्रा पर प्रकाश डाल रहा है

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क्या एकरूपता की मांग में टिक पाएगी डोंगरिया कोंध शॉल?

GI टैग मिलने के दो साल बाद डोंगरिया कोंध शॉल को वैश्विक पहचान तो मिली, पर उसके साथ एकरूपता की मांग भी बढ़ी। सवाल यह है कि क्या परंपरा बाजार की शर्तों पर टिक पाएगी? The Indian Tribal की रिपोर्ट

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बीज, मिट्टी और गीतों के ज़रिये जैविक खेती मिशन पर है यह आदिवासी किसान

ओडिशा के संबलपुर जिले के एक धुरुआ आदिवासी किसान जैविक खेती और लोककला के जरिए देसी धान की किस्मों को संरक्षित कर रहे हैं। निरोज रंजन मिसरा को उन्होंने बताया कि बीज, मिट्टी और संस्कृति मिलकर ही टिकाऊ कृषि का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं

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यह दुर्लभ सुपरफूड जनजातीय खानपान और स्वास्थ्य का सदियों पुराना आधार है

यह जनजातीय भोजन परंपरा का मूल हिस्सा है, जो पोषण और संस्कृति दोनों की धुरी पर टिका है। सौमेंद्र नाथ दास बता रहे हैं कैसे तेजी से बदलते मौसम और जंगलों की क्षति इसके अस्तित्व पर नई चुनौतियाँ खड़ी कर रही हैं

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हम लड़े हैं, तभी बचे हैं: खरसावां शहीद दिवस पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

मुख्यमंत्री ने कहा, खरसावां के वीर शहीदों के वंशजों को सम्मानित करने हेतु विशेष आयोग का होगा गठन। जल-जंगल-जमीन की रक्षा में बलिदान देने वाले वीरों का सम्मान राज्य का नैतिक दायित्व है। The Indian Tribal की रिपोर्ट

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705
Individual ethnic groups are notified as Scheduled Tribes as per Census 2011
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