ओडिशा के नबरंगपुर में आदिवासी किसानों की मक्का खेती ने कैसे बदली तस्वीर
हालांकि कम बाजार भाव, एमएसपी की सीमित जानकारी और गुणवत्ता के आधार पर कीमत तय होना अब भी किसानों के लिए चुनौती है, बता रहे हैं निरोज रंजन मिसरा
Read moreDetailsहालांकि कम बाजार भाव, एमएसपी की सीमित जानकारी और गुणवत्ता के आधार पर कीमत तय होना अब भी किसानों के लिए चुनौती है, बता रहे हैं निरोज रंजन मिसरा
Read moreDetailsवन विभाग की पहल से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शिकार में कमी आई है और मालाबार पाइड हॉर्नबिल और विशाल गिलहरी जैसी दुर्लभ प्रजातियां अब फिर से जंगलों में दिखाई देने लगी हैं। दीपन्विता गीता नियोगी की रिपोर्ट
Read moreDetailsभाग-2 भारत के आदिवासी समुदाय अब केवल सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थी नहीं रह गए हैं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मुख्यधारा में अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं। बुनियादी ढांचे, शिक्षा, पुनर्वास और PVTGs पर केंद्रित नीतियों ने इस बदलाव को नई गति दी है, लिखते हैं [...]
Read moreDetailsभाग-1शिक्षा पर नए सिरे से जोर, वन उपज में मूल्य संवर्धन और जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण अब अधिक आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण की राह तैयार कर रहे हैं। लगभग आठ दशकों के विकासात्मक पिछड़ेपन के बाद आदिवासी क्षेत्रों में बदलाव की एक नई प्रक्रिया दिखाई दे रही [...]
Read moreDetailsउखरूल में पूर्व पेशेवर फुटबॉलर सीमित संसाधनों और वर्षों की अस्थिरता के बावजूद आदिवासी बच्चों को फुटबॉल की ट्रेनिंग दे रहे हैं। उनका मानना है कि भारत का फुटबॉल भविष्य मजबूत ग्रासरूट्स प्रणाली और शुरुआती प्रशिक्षण पर निर्भर करता है, लिखती हैं दीपान्विता गीता नियोगी
Read moreDetailsउनकी पहल दिखाती है कि आदिवासी ज्ञान और सामुदायिक भागीदारी आने वाली पीढ़ियों के लिए देशी फसल विविधता के संरक्षण में किस तरह मददगार हो सकती है। नीरोज रंजन मिश्रा की रिपोर्ट
Read moreDetailsहमने हाल ही में "आदिवासी दाइयों का सम्मान: जीवन और कल्याण की सुरक्षा" विषय के साथ विश्व के आदिवासी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया। अर्चना ज्योति दो अध्ययनों के जरिए यह बताती हैं कि आदिवासी समुदायों में पारंपरिक दाइयाँ अब भी क्यों अपरिहार्य बनी हुई हैं
Read moreDetailsउत्कल विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्टडीज़ ऑन ट्राइबल एंड मार्जिनलाइज़्ड कम्युनिटीज़ की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि तीव्र सामाजिक-आर्थिक बदलाव से सदियों पुरानी आदिवासी विवाह परंपराएँ विलुप्त होने से पहले उनका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। The Indian Tribal की रिपोर्ट। भाग-2
Read moreDetailsफिल्म फेस्टिवल के दौरान आदिवासी जीवन, स्वदेशी संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और उत्कृष्ट सिनेमा पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। महोत्सव में 33 जनजातियों की संस्कृति और परंपराओं की प्रस्तुति भी होगी। The Indian Tribal की रिपोर्ट
Read moreDetailsयह वृक्ष केवल जंगलों की शान नहीं, बल्कि आदिवासी जीवन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पारंपरिक चिकित्सा, जैव विविधता और जलवायु सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार माना जाता है। The Indian Tribal की रिपोर्ट भाग-2
Read moreDetailsThe Indian Tribal is India’s first bilingual (English & Hindi) digital journalistic venture dedicated exclusively to the Scheduled Tribes. The ambitious, game-changer initiative is brought to you by Madtri Ventures Pvt Ltd (www.madtri.com). From the North East to Gujarat, from Kerala to Jammu and Kashmir — our seasoned journalists bring to the fore life stories from the backyards of the tribal, indigenous communities comprising 10.45 crore members and constituting 8.6 percent of India’s population as per Census 2011. Unsung Adivasi achievers, their lip-smacking cuisines, ancient medicinal systems, centuries-old unique games and sports, ageless arts and crafts, timeless music and traditional musical instruments, we cover the Scheduled Tribes community like never-before, of course, without losing sight of the ailments, shortcomings and negatives like domestic abuse, alcoholism and malnourishment among others plaguing them. Know the unknown, lesser-known tribal life as we bring reader-engaging stories of Adivasis of India.
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