रांची
झारखंड के बहुचर्चित सीएनटी एक्ट उल्लंघन मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला आया। राज्य के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का, रांची के तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात समेत कुल 10 अभियुक्तों को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस.एन. तिवारी की अदालत ने दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई के लिए 30 अगस्त 2025 की तारीख तय की है। दोषियों को फिलहाल बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया गया है।
इस मामले में आरोपी पूर्व मंत्री एनोस एक्का पर आरोप था कि उन्होंने 16 साल पहले 1.18 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की आदिवासी जमीन खरीदी, जिसमें फर्जी पते का इस्तेमाल कर नियमों का उल्लंघन किया गया। यह खरीदारी सीएनटी एक्ट (CNT Act) के प्रावधानों को दरकिनार कर की गई थी, जबकि यह अधिनियम अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है।
“सीबीआई के विशेष न्यायाधीश, रांची की अदालत ने आज 10 आरोपियों— एनोस एक्का, मेनन एक्का, कार्तिक प्रभात, राज किशोर सिंह, फिरोज अख्तर, बृजेश मिश्रा, अनिल कुमार, मनीलाल महतो, ब्रजेश महतो और पशुराम केरकेट्टा—को सीएनटी एक्ट उल्लंघन कर की गई ज़मीन की खरीद-बिक्री के मामले में दोषी करार दिया है,” सीबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया।
सीबीआई ने यह मामला 11 अगस्त 2010 को दर्ज किया था। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर यह एफआईआर पूर्व मंत्रियों हरिनारायण राय और एनोस एक्का समेत अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थी। यह आदेश 2008 और 2009 में दाखिल की गई दो जनहित याचिकाओं पर आया था।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2006 से 2008 के बीच एनोस एक्का ने अपनी पत्नी मेनन एक्का के नाम पर रांची में बड़ी मात्रा में ज़मीन खरीदी थी। इन ज़मीनों की खरीद पर 1.18 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। सीबीआई के अनुसार, यह ज़मीन अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों से खरीदी गई थी, जो भूमि संरक्षण कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन था।
सीबीआई के बयान में कहा गया, “एलआरडीसी (भूमि सुधार उपसमाहर्ता), उनके कर्मचारी और सर्कल अधिकारी मेनन और एनोस एक्का के साथ मिलीभगत में थे। तथ्यों के बावजूद उन्होंने ज़मीन हस्तांतरण की अनुशंसा की। एलआरडीसी ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से अनुकूल रिपोर्ट तैयार कराई और ज़मीन हस्तांतरण को मंजूरी दी।” जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 10 दिसंबर 2012 को 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह महाराणा ने बताया कि इस मामले में राजस्व कर्मचारी गोवर्धन बैठा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। वहीं एक अन्य आरोपी पशुराम केरकेट्टा के खिलाफ रिकॉर्ड को अलग कर दिया गया क्योंकि वह आईसीयू में भर्ती हैं। सीबीआई की ओर से वरीय लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह और पीपी खुशबू जायसवाल ने अदालत में 18 गवाहों को पेश किया।
जमीन की खरीद कैसे हुई?
अदालत के अनुसार, एनोस एक्का ने अपनी पत्नी मेनन एक्का के नाम पर मार्च 2006 से मई 2008 के बीच कई जगहों पर जमीन खरीदी थी, जिसमें शामिल हैं:
• हिनू में 22 कट्ठा
• ओरमांझी में 12 एकड़ से अधिक
• रांची के नेवरी में 4 एकड़ से अधिक
• चुटिया के सिरम मौजा, स्टेशन रोड पर 9 डिसमिल
यह सभी खरीदारी सीएनटी एक्ट का उल्लंघन करते हुए की गई, जिसमें अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर लेन-देन हुआ।
एनोस एक्का के खिलाफ पुराने मामले
- 2020 में मनी लॉन्ड्रिंग केस: रांची की एक अदालत ने एनोस एक्का को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के आधार पर सात साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई थी। यह फैसला न्यायाधीश अनिल मिश्रा ने सुनाया था। एक्का को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 4 के तहत दोषी पाया गया था।
- 2018 में हत्या का मामला: एनोस एक्का को परा-शिक्षक मनोज कुमार की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया था। इस केस में उन्हें 2014 में गिरफ्तार किया गया था और जुलाई 2018 में अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
एनोस एक्का झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास, एनआरईपी, परिवहन, पंचायती राज और भवन निर्माण मंत्री रहे थे। उनका कार्यकाल 12 मार्च 2005 से 19 दिसंबर 2008 तक रहा।