• About
  • Contact
  • Sitemap
  • Gallery
No Result
View All Result
Vacancies
Saturday, January 31, 2026
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा: जिसने भारत को आदिवासी चेतना दी

    The Indian Tribal

    क्या एकरूपता की मांग में टिक पाएगी डोंगरिया कोंध शॉल?

    The Indian Tribal

    बीज, मिट्टी और गीतों के ज़रिये जैविक खेती मिशन पर है यह आदिवासी किसान

    The Indian Tribal

    यह दुर्लभ सुपरफूड जनजातीय खानपान और स्वास्थ्य का सदियों पुराना आधार है

    The Indian Tribal

    हम लड़े हैं, तभी बचे हैं: खरसावां शहीद दिवस पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    पेसा कानून की जानकारी सभी को रखने की आवश्यकता: हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    लम्बा इंतज़ार खत्म, झारखण्ड में आखिरकार पेसा नियमावली को मिली मंजूरी

    The Indian Tribal

    सुप्रीम कोर्ट ने एशिया के सबसे बड़े साल जंगल सारंडा में ‘सीमा’ क्यों तय की?

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
The Indian Tribal
  • Home
  • Achievers
    • उपलब्धिकर्ता
  • Cuisine
    • खान पान
  • Health
    • स्वास्थ्य
  • Legal
    • कानूनी
  • Music
    • संगीत
  • News
    • Updates
    • खबरें
  • Sports
    • खेलकूद
  • Variety
    • विविध
  • हिंदी
    • All
    • आदिवासी
    • उपलब्धिकर्ता
    • कला और संस्कृति
    • कानूनी
    • खबरें
    • खान पान
    • खेलकूद
    • जनजाति
    • भारत
    • विविध
    • संगीत
    • संस्कृति
    • स्वास्थ्य
    The Indian Tribal

    मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा: जिसने भारत को आदिवासी चेतना दी

    The Indian Tribal

    क्या एकरूपता की मांग में टिक पाएगी डोंगरिया कोंध शॉल?

    The Indian Tribal

    बीज, मिट्टी और गीतों के ज़रिये जैविक खेती मिशन पर है यह आदिवासी किसान

    The Indian Tribal

    यह दुर्लभ सुपरफूड जनजातीय खानपान और स्वास्थ्य का सदियों पुराना आधार है

    The Indian Tribal

    हम लड़े हैं, तभी बचे हैं: खरसावां शहीद दिवस पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    पेसा कानून की जानकारी सभी को रखने की आवश्यकता: हेमन्त सोरेन

    The Indian Tribal

    लम्बा इंतज़ार खत्म, झारखण्ड में आखिरकार पेसा नियमावली को मिली मंजूरी

    The Indian Tribal

    सुप्रीम कोर्ट ने एशिया के सबसे बड़े साल जंगल सारंडा में ‘सीमा’ क्यों तय की?

  • Gallery
    • Videos
  • Latest News
No Result
View All Result
The Indian Tribal
No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
  • Gallery
  • Latest News
Vacancies
Home » द इंडियन ट्राइबल / हिंदी » विविध » अनूठा स्कूल लगा रहा आदिवासी बच्चों के सपनों को पंख

अनूठा स्कूल लगा रहा आदिवासी बच्चों के सपनों को पंख

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के सुरम्य चंदेनार गांव में स्थित स्कूल गोंड और हल्बी जातियों के बच्चों को वैकल्पिक शिक्षा का सबसे सुलभ और बेहतरीन माध्यम है। विस्तृत जानकारी लाई हैं दीपान्विता गीता नियोगी

November 20, 2023
The Indian Tribal | Children learning counting through stones

बच्चे पत्थरों के माध्यम से गिनती सिखते हुए (सभी तस्वीरें - प्रणित सिम्हा)

चांदनेर

माओवादी प्रभावित आदिवासी जिले दंतेवाड़ा में शिक्षाविद् प्रणीत सिम्हा अपना ड्रीम प्रोजेक्ट सपनों की शाला चला रहे हैं। स्कूल यहां के बच्चों के सपनों को पंख लगा रहा है। बस्तर उपमंडल के इस क्षेत्र में अपनी तरह का अनूठे स्कूल शुरू करना कोई आसान बात नहीं थी, लेकिन बच्चों की शिक्षा से जुड़े सामाजिक संगठन बचपन बनाओ के जरिए सरकारी स्कूलों में काम करने के अनुभव ने उन्हें इसमें खासी मदद की। आज वह सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं।

सिम्हा बताते हैं कि शुरुआत में वह पोर्टा केबिन स्कूलों से जुड़े थे, लेकिन जल्दी ही उनसे बाहर आ गए। जब उन्होंने इन आवासीय विद्यालयों में काम किया, तो एहसास हुआ कि ये स्कूल हिंसा के जवाब में बच्चों के लिए अस्थायी व्यवस्था का हिस्सा हैं। सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे स्थानों पर पोर्टा केबिन स्कूलों में लगभग 35,000 ऐसे छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं, जो अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं। 

सिम्हा ने महसूस किया कि सबसे महत्वपूर्ण बात ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्कूलों को मजबूत करना है। सपनों की शाला में आदिवासी छात्रों को विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के साथ अलग तरह से शिक्षा प्रदान की जाती है। शिक्षाविद् सिम्हा का मानना है कि आदिवासी बच्चों के लिए नियमित स्कूल संरचना प्रासंगिक नहीं है।

The Indian Tribal | Children engrossed in their classes
बच्चे अपनी कक्षाओं में तल्लीन हैं

The Indian Tribal से बात करते हुए सिम्हा कहते हैं कि आदिवासी बच्चे खुले माहौल यानी बिना किसी प्रतिबंध के बड़े होते हैं। इसलिए, सख्त अनुशासन वाले सामान्य स्कूल उनके लिए कारगर नहीं हो सकते। बस्तर जैसे क्षेत्रों के संदर्भ में बच्चों के बड़ी संख्या में स्कूल छोडऩे के पीछे गरीबी मुख्य कारण नहीं है, बल्कि भाषा जैसे अन्य अवरोध भी होते हैं। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षण का माध्यम हिंदी है, लेकिन आदिवासी बच्चे तो घर पर हल्बी या गोंडी बोलते हैं। 

उन्होंने दावा किया कि चूंकि भाषा के कारण शिक्षकों और छात्रों के बीच स्वस्थ संवाद नहीं हो पाता,  इसलिए छात्र पाठ याद करने में पिछड़ जाते हैं। ऐसे माहौल में शिक्षा हासिल करना उनके लिए कड़ा संघर्ष है।

एक और बात,  सरकारी शिक्षण का पाठ्यक्रम आदिवासी सांस्कृतिक पहचान से अलग है। उदाहरण के लिए जब अंग्रेजी में अक्षर पढ़ाए जाते हैं, तो ए का मतलब एप्पल और बी का मतलब बॉल बताया जाता है। वास्तव में, शहरों में जरूर बच्चे इन चीजों के बारे में जानते हैं, लेकिन बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में कई आदिवासी छात्र सेब से परिचित ही नहीं होते। इस प्रकार उनके लिए सेब की पहेली सुलझाना अक्षर सीखने से बड़ी चुनौती बन जाता है।

The Indian Tribal | Students bond with nature
विद्यार्थी का प्रकृति से जुड़ाव
The Indian Tribal | Sapno ki Shala (left); Children learning counting through stones (Right)
सपनों की शाला

वह याद करते हुए बताते हैं कि एक बार कक्षा पांच के छात्रों को कंप्यूटर के बारे में समझाते हुए उन्होंने कहा था कि कोई भी इसका उपयोग करके ट्रेन टिकट बुक कर सकता है, लेकिन कई छात्रों को यह बात समझने में कठिनाई हुई, क्योंकि उन्हें कंप्यूटर या ट्रेन के बारे में अधिक जानकारी ही नहीं थी।

सपनों की शाला का माहौल बिल्कुल अलग है। यह स्कूल पूरे भारत की शिक्षा व्यवस्था द्वारा अपनाई जाने वाली वार्षिक समयसारिणी का पालन नहीं करता। बल्कि, यह अमुस जैसे आदिवासी त्योहारों और आजीविका की जरूरतों जैसे बुआई, कटाई और महुआ संग्रह के सीजन को ध्यान में रखते हुए संचालित होता है, क्योंकि इन कामों में बच्चे भी पूरे दिन अपने परिवार के साथ हाथ बंटाते हैं। इस कारण वे कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते।

सिम्हा यह भी बताते हैं कि सपनों की शाला में हर बुधवार को बच्चों की उपस्थिति कम होती है, क्योंकि वे गांवों में लगने वाले हाट-बाजारों में जरूरत का सामान खरीदने या छोटे-मोटे सामान बेचने जाते हैं और इस कारण स्कूल नहीं आ पाते। सपनों की शाला में इन मुद्दों को समझने और जनजातीय मूल्यों को बरकरार रखते हुए आधुनिक शिक्षा प्रणाली से बच्चों को जोडऩे का प्रयास किया जाता है। 

The Indian Tribal | A child immersed in drawing her imagination
एक बच्ची अपनी कल्पना को चित्रित करने में डूबी हुई

वर्तमान में स्कूल सामुदायिक भवन में चलाया जाता है और स्थानीय लोग इसमें पूरा सहयोग कर रहे हैं। यहां 40 बच्चे पढ़ते हैं। यह स्कूल कक्षा 1 से 7 तक के बच्चों के लिए है। यह राज्य सरकार के पाठ्यक्रम के तहत संचालित हो रहा है। स्कूल में चार पूर्णकालिक और तीन अंशकालिक शिक्षक हैं। यही नहीं, बच्चों को बर्तन बनाने की कला सिखाने के लिए गांव से एक कुम्हार भी आते हैं। 

सपनों की शाला में कार्यरत एक शिक्षक लोकेश कुंजाम 2018 से यहां विज्ञान और पर्यावरण पढ़ाते हैं। वह बताते हैं कि हमारे यहां हर रोज पढ़ाई से पहले एक घंटे तक असेंबली होती है। यह सामान्य प्रार्थना से अलग कार्यक्रम है। इसमें बच्चे बारी-बारी से गाते हैं, कहानियां सुनाते हैं और कुछ अपने अभिनय कौशल का प्रदर्शन भी करते हैं। यानी बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर पूरा जोर दिया जाता है। लोकेश कहते हैं कि बच्चों द्वारा अपने शिक्षक चुनने का भी हक दिया जाता है। यह अलग तरह का प्रयोग है। 

शिक्षक कुंजाम ने बताया कि सभी शिक्षक आमतौर पर शनिवार को ही यह योजना तैयार कर लेते हैं कि उन्हें पूरे सप्ताह क्या-क्या और कैसे पढ़ाना है। वे छात्रों को घेरे हुए हमेशा कक्षाओं के अंदर नहीं बैठते। वह बच्चों को एकल अंक सिखाने के लिए पत्थरों का उपयोग करते हैं।बच्चों में सामाजिक मसले सुलझाने की कला विकसित करने के लिए बाल संसद की अवधारणा भी शुरू की गई है। इसके तहत बच्चे यह तय करते हैं कि झगड़ा होने पर क्या करना है और शौचालय जैसे स्कूल से संबंधित महत्वपूर्ण मामलों को कैसे हल करवाना है। शिक्षकों का पूरा प्रयास यही रहता है कि बच्चों के साथ बराबरी का व्यवहार किया जाए। यदि छात्र फर्श पर बैठते हैं, तो शिक्षक भी वैसा ही करते हैं, वे स्वयं कुर्सी पर नहीं बैठते।

Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri Root Woot | Online Puja Samagri

In Numbers

49.4 %
Female Literacy rate of Scheduled Tribes

Web Stories

Bastar’s Famed Tuma Craft On Verge Of Extinction
Bastar’s Famed Tuma Craft On Verge Of Extinction
By The Indian Tribal
7 Tribal-linked Odisha Products Get GI Tag
7 Tribal-linked Odisha Products Get GI Tag
By The Indian Tribal
Traditional Attire Of Pawara Tribeswomen Losing Its Charm
Traditional Attire Of Pawara Tribeswomen Losing Its Charm
By The Indian Tribal
Tuma Art Going Extinct
Tuma Art Going Extinct
By The Indian Tribal

Update

400 ST guests at R-Day parade; C’garh tableau to showcase tribal life

Adding to the diversity of the viewers' gallery at this year’s Republic Day parade will be as many as 400 tribals from across the country, especially invited by the Modi Government. The representatives of the indigenous communities hailing from remote forests, highlands, and borderlands across the country will also get a chance to call on Prime Minister Narendra Modi. They will join 5,000 "special guests", who have made exceptional contributions to nation-building, and their spouses, to watch the spectacle. Among others, one of the key highlights will be the Chhattisgarh tableau showcasing colourful glimpses of tribal life, reflecting the deep-rooted cultural identity of the state. The presentation will highlight, traditional tribal art forms, folk dances and music, distinctive tribal costumes and elements of historical and cultural heritage.
The Indian Tribal
आदिवासी

बीज, मिट्टी और गीतों के ज़रिये जैविक खेती मिशन पर है यह आदिवासी किसान

by The Indian Tribal
January 17, 2026

ओडिशा के संबलपुर जिले के एक धुरुआ आदिवासी किसान जैविक खेती और लोककला के जरिए देसी धान की किस्मों को संरक्षित कर रहे हैं। निरोज रंजन मिसरा को उन्होंने बताया कि बीज, मिट्टी और संस्कृति मिलकर ही टिकाऊ कृषि का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं

The Indian Tribal

Skateboarding Transforming Tribal Youth Culture In Gangtok

January 15, 2026
The Indian Tribal

From Sacred Hills To Global Shelves: Can Dongria Shawl Survive Demand For Uniformity?

January 9, 2026
The Indian Tribal

यह दुर्लभ सुपरफूड जनजातीय खानपान और स्वास्थ्य का सदियों पुराना आधार है

January 6, 2026
The Indian Tribal

Tribal Farmer-Cum-Folk Artiste’s Mission To Promote Organic Farming In Odisha

January 4, 2026
The Indian Tribal

Jaipal Singh Munda: Oxford-Educated Tribal Icon Who Gave India Its Adivasi Voice

January 2, 2026
Previous Post

कभी चखे हैं पूर्वोत्तर के ये स्वादिष्ट व्यंजन?

Next Post

Tribal Areas To Benefit As President’s Home Turf Gets Rail Connectivity

Top Stories

The Indian Tribal
आदिवासी

क्या एकरूपता की मांग में टिक पाएगी डोंगरिया कोंध शॉल?

January 28, 2026
The Indian Tribal
Latest News

Republic Day Tableaux Celebrate Tribal Heritage, Self-Reliant India

January 26, 2026
The Indian Tribal
Jharkhand

Jaipal Singh Munda to Radhakrishnan: Jharkhand Deepens Intellectual Ties With Oxford Colleges

January 25, 2026
Load More
  • About Us
  • Contact
  • Team
  • Redressal
  • Copyright Policy
  • Privacy Policy And Terms Of Use
  • Disclaimer
  • Sitemap

  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Hindi Featured
  • India
  • News
  • Legal
  • Music
  • Sports
  • Trending
  • Chhattisgarh
  • Delhi
  • Gujarat
  • Jammu & Kashmir
  • Jharkhand
  • Kerala
  • Madhya Pradesh
  • Maharashtra
  • North East
  • Arunachal Pradesh
  • Assam
  • Manipur
  • Meghalaya
  • Mizoram
  • Nagaland
  • Sikkim
  • Tripura
  • Odisha
  • Telangana
  • West Bengal
  • Political News
  • Variety
  • Art & Culture
  • Entertainment
  • Adivasi
  • Tribal News
  • Scheduled Tribes
  • हिंदी
  • उपलब्धिकर्ता
  • कानूनी
  • खान पान
  • खेलकूद
  • स्वास्थ्य
  • संस्कृति
  • संगीत
  • विविध
  • कला और संस्कृति
  • खबरें
  • असम की ताज़ा ख़बरें
  • अरुणाचल प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • ओडिशा की ताज़ा ख़बरें
  • केरल की ताज़ा ख़बरें
  • गुजरात की ताज़ा ख़बरें
  • छत्तीसगढ़
  • जम्मू और कश्मीर की ताज़ा ख़बरें
  • झारखंड न्यूज़
  • तेलंगाना की ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • नॉर्थईस्ट की ताज़ा ख़बरें
  • पश्चिम बंगाल की ताज़ा ख़बरें
  • मध्य प्रदेश की ताज़ा ख़बरें
  • महाराष्ट्र की ताज़ा ख़बरें
  • त्रिपुरा की ताज़ा ख़बरें
  • नागालैंड की ताज़ा ख़बरें
  • मणिपुर की ताज़ा ख़बरें
  • मिजोरम की ताज़ा ख़बरें
  • मेघालय की ताज़ा ख़बरें
  • सिक्किम की ताज़ा ख़बरें
  • राजस्थान की ताज़ा ख़बरें

About Us

The Indian Tribal is India’s first bilingual (English & Hindi) digital journalistic venture dedicated exclusively to the Scheduled Tribes. The ambitious, game-changer initiative is brought to you by Madtri Ventures Pvt Ltd (www.madtri.com). From the North East to Gujarat, from Kerala to Jammu and Kashmir — our seasoned journalists bring to the fore life stories from the backyards of the tribal, indigenous communities comprising 10.45 crore members and constituting 8.6 percent of India’s population as per Census 2011. Unsung Adivasi achievers, their lip-smacking cuisines, ancient medicinal systems, centuries-old unique games and sports, ageless arts and crafts, timeless music and traditional musical instruments, we cover the Scheduled Tribes community like never-before, of course, without losing sight of the ailments, shortcomings and negatives like domestic abuse, alcoholism and malnourishment among others plaguing them. Know the unknown, lesser-known tribal life as we bring reader-engaging stories of Adivasis of India.

Follow Us

All Rights Reserved

© 2024 Madtri Ventures [P] Ltd.

No Result
View All Result
  • Home
  • Achievers
  • Cuisine
  • Health
  • Health
  • Legal
  • Music
  • News
  • Sports
  • Variety
  • हिंदी
    • उपलब्धिकर्ता
    • खान पान
    • कानूनी
    • खेलकूद
    • खेलकूद
    • संगीत
    • संगीत
    • स्वास्थ्य
    • स्वास्थ्य
    • विविध
  • Gallery
  • Videos

© 2024 Madtri Ventures [P] Ltd.

Bastar’s Famed Tuma Craft On Verge Of Extinction 7 Tribal-linked Odisha Products Get GI Tag Traditional Attire Of Pawara Tribeswomen Losing Its Charm Tuma Art Going Extinct